गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्य प्रदेश के वन विभाग में शीर्ष स्तर पर अभूतपूर्व प्रशासनिक टकराव सामने आया है। अनुसंधान विस्तार एवं लोक वानिकी शाखा में प्रभारी पद को लेकर पीसीसीएफ पुरुषोत्तम धीमान और एपीसीसीएफ मोहनलाल मीना आमने-सामने आ गए हैं। दोनों अधिकारियों के बीच अधिकारों को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि पीसीसीएफ धीमान ने हॉफ असीम श्रीवास्तव को पत्र लिखकर साफ कहा है – “मीना को हटाइए या फिर मुझे ही इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दीजिए।”

पीसीसीएफ धीमान का आरोप है कि मीना शाखा के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं और उनकी अनुमोदन प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे आदेश जारी कर रहे हैं। इससे कार्यालयीन व्यवस्था बाधित हो रही है और अधीनस्थ कर्मचारी असमंजस की स्थिति में हैं कि किसके आदेश का पालन करें।
मीना कर रहे हैं फाइलों का सीधे निराकरण
धीमान ने आरोप लगाया है कि विधानसभा सत्र से जुड़े दस्तावेज, प्रशासकीय स्वीकृतियां, नर्सरी स्थापना, वन वृत्तों की समीक्षा बैठकें और अन्य प्रमुख निर्णय बिना उनके अनुमोदन के ही मीना द्वारा किए जा रहे हैं। यहां तक कि कई फाइलों पर यह टिप्पणी लिखी जा रही है कि “प्रकरण पीसीसीएफ तक भेजने की आवश्यकता नहीं है।”
धीमान ने हॉफ को लिखा है कि इस स्थिति में कार्य करना बेहद कठिन हो गया है और प्रशासनिक मर्यादा व पद की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
जनवरी में ही शुरू हो गया था विवाद का संकेत

सूत्रों के अनुसार इस टकराव की भूमिका जनवरी 2025 में ही तैयार हो गई थी, जब महिला प्रताड़ना मामले में एपीसीसीएफ मीना पर एफआईआर दर्ज हुई और ठीक अगले दिन उन्हें अनुसंधान विस्तार एवं लोक वानिकी शाखा का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। यह निर्णय विभाग के भीतर कई वरिष्ठ अधिकारियों को चौंकाने वाला लगा था।
अब जब दोनों अधिकारियों के बीच अधिकारों की जंग खुलकर सामने आ चुकी है, वन विभाग के अफसरों की निगाहें हॉफ असीम श्रीवास्तव के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
विभाग में पसरा असमंजस
इस पूरे प्रकरण ने शाखा में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। वे समझ नहीं पा रहे कि उन्हें फाइलें किसके पास भेजनी हैं। वरिष्ठ अफसरों की आपसी खींचतान का सीधा असर विभाग की कार्यक्षमता और जनहित के कार्यों पर पड़ता नजर आ रहा है।
उम्मीदें निर्णय की ओर
अब सबकी नजरें हॉफ श्रीवास्तव पर हैं कि वह इस टकराव को किस तरह हल करते हैं। क्या एपीसीसीएफ मीना से अतिरिक्त प्रभार वापस लिया जाएगा या फिर पीसीसीएफ धीमान को हटाया जाएगा? फिलहाल, इस टकराव ने वन विभाग की कार्यशैली और वरिष्ठ नेतृत्व की सामंजस्य क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
