गणेश पाण्डेय, भोपाल। राज्य वन विभाग की ई-गवर्नेंस व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए अब वनोपज या काष्ठ परिवहन के लिए जारी ऑनलाइन ट्रांजिट परमिट (टीपी) व्यवस्था में चेकपोस्ट की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब वाहन को किसी भौतिक चेकिंग पॉइंट से गुजरने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि ऑनलाइन सिस्टम पर ही मैप के जरिए मार्ग विकल्प दिखाए जाएंगे।
यह निर्णय वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसमें वनोपज की ऑनलाइन नीलामी, एनओसी और ई-टीपी प्रणाली की प्रगति की समीक्षा की गई।

महत्वपूर्ण फैसले:
- चेकपोस्ट की अनिवार्यता समाप्त: अब परिवहन मार्ग पर फिजिकल चेकपोस्ट की बाध्यता नहीं होगी, जिससे ट्रांसपोर्टरों को सुगमता होगी।
- वाहन फोटो अपलोड की बाध्यता भी समाप्त: ईटीपी के लिए वाहन की फोटो डालना अब जरूरी नहीं रहेगा।
- समस्त प्रजातियों पर ईटीपी अनिवार्य: काष्ठ, बांस या किसी भी वनोपज के आवागमन के लिए टीपी अनिवार्य रहेगा।
- GIS आधारित ग्राम स्तरीय मैपिंग: ग्रामों से वनोपज निकलने के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने GIS मैपिंग की जाएगी।
- डिजिटल सूचना प्रणाली को सशक्त किया जाएगा: आवेदक, टीपी अधिकारी और विभागीय स्टाफ को SMS, ईमेल व भविष्य में व्हाट्सएप अलर्ट मिलेंगे।
- टीपी शुल्क की गणना में बदलाव प्रस्तावित: अभी शुल्क वाहन और वनोपज दोनों के आधार पर लिया जाता है, लेकिन भविष्य में केवल वनोपज के आयतन के आधार पर शुल्क लिया जाएगा।
सत्यापन और निगरानी में तकनीकी सुधार
वर्तमान में काष्ठ के सत्यापन के लिए हैमरिंग प्रणाली (लकड़ी पर चिन्हित करना) अपनाई जाती है। बैठक में यह भी प्रस्तावित हुआ कि इसकी जगह RFID टैग का उपयोग किया जाए। इस पर एमपी इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से व्यवहारिकता, लागत और निगरानी तंत्र पर अध्ययन कर रिपोर्ट देने को कहा गया।
साथ ही फील्ड स्तर पर सत्यापन के लिए ऑनलाईन प्रणाली में एक भौतिक सत्यापन मॉड्यूल जोड़ा जाएगा, जिसे बाद में मोबाइल एप में भी शामिल किया जाएगा।
वन विभाग की ईटीपी प्रणाली में यह सुधार पारदर्शिता, गति और सरलता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल वनोपज व्यापार से जुड़े लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि विभाग की निगरानी व्यवस्था भी तकनीकी रूप से अधिक सक्षम होगी।
