2025 में 23 वन अधिकारी होंगे रिटायर

सप्लायर्स बोले- एक ही दिन में टेंडर जारी, आवेदन और स्वीकृति कैसे संभव?

गणेश पाण्डेय, भोपाल। धार वन मंडल में हुए टेंडर घोटाले को लेकर वन विभाग में उच्चस्तरीय चुप्पी से असंतुष्ट सप्लायर्स ने अब अदालत की शरण ली है। आरोप है कि वन विभाग के डीएफओ द्वारा क्रय प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर एक पसंदीदा फर्म को टेंडर का लाभ पहुंचाया गया। मामले में याचिकाकर्ता हितेंद्र भावसार और तुलसी ट्रेडर्स ने तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं का हवाला देते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

एक ही दिन में टेंडर, आवेदन और स्वीकृति!

3 जुलाई को धार डीएफओ द्वारा एक ही दिन में 5 टेंडर निकाले गए। शाम 5:45 और 7:27 बजे टेंडर अपलोड किए गए और उसी दिन रात 8:11 और 9:28 पर एक विशेष फर्म द्वारा टेंडर भर दिए गए। इतना ही नहीं, उसी दिन उस फर्म को क्वालिफाई भी कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को नियम 10.1.2 और 10.1.3 के विपरीत बताया है, जिसमें टेंडर प्रकाशन के लिए पूर्व सूचना देना आवश्यक होता है।

सत्यापन निधि कैसे बनी जब बैंक और कोर्ट बंद थे?

सप्लायर्स ने याचिका में यह भी सवाल उठाया है कि टेंडर के लिए आवश्यक सत्यंकार निधि का डीडी उसी दिन जमा किया गया, जबकि बैंक और न्यायालय उस समय बंद थे। इससे यह संदेह पुख्ता होता है कि संबंधित फर्म को पहले से टेंडर की जानकारी दी गई थी।

आईपी ऐड्रेस से हुई गड़बड़ी की पुष्टि की आशंका

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि निविदा जिन कंप्यूटरों से बनाई, बढ़ाई और खोली गई, उनकी आईपी ऐड्रेस और चाही गई फर्म के कंप्यूटर की आईपी ऐड्रेस समान होने की आशंका है। इससे एक ही सिस्टम से पूरी निविदा प्रक्रिया को प्रभावित करने की बात सामने आई है।

विवादित डीएफओ के पास तीन जिलों का प्रभार

डीएफओ धार जिन पर यह पूरा मामला केंद्रित है, उन्हें धार के साथ-साथ अलीराजपुर और झाबुआ जिलों का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। विभागीय गलियारों में यह चर्चा है कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष कृपा प्राप्त है, जिससे विभागीय कार्यवाही नहीं हो रही।

वन मंडल टेंडर घोटाला
सांकेतिक कार्टून

वन भवन में चुप्पी, फील्ड में सवाल

विभागीय स्तर पर अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इस गंभीर मामले पर टिप्पणी नहीं की है। वहीं फील्ड में कार्यरत अन्य सप्लायर्स और ठेकेदारों में रोष व्याप्त है। उन्हें आशंका है कि यदि इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो वन विभाग की पूरी निविदा प्रणाली पर से विश्वास उठ जाएगा।

सप्लायर्स की मांग- न्यायिक जांच हो

हितेंद्र भावसार और तुलसी ट्रेडर्स ने अदालत से निवेदन किया है कि इस टेंडर प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द कर निष्पक्ष नई प्रक्रिया शुरू की जाए।