सीएफ-डीएफओ गठजोड़ के आरोप, सांसद की शिकायत पर महिला फील्ड डायरेक्टर भी हटीं, निविदा प्रक्रिया की तकनीकी पड़ताल जरूरी

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के वन विभाग में टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं। धार वनमंडल में हुए एक टेंडर घोटाले की गंभीर शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए डीएफओ अशोक सोलंकी को हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया है। साथ ही, पन्ना टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर अंजना सुचिता तिर्की को भी उनके पद से हटाकर मुख्यालय भेजा गया है। वन विभाग द्वारा गुरुवार को एक दर्जन आईएफएस अधिकारियों के तबादलों की सूची जारी की गई, जिसने विभागीय हलकों में हलचल मचा दी है।

टेंडर में घंटों में पूरी कर दी गई करोड़ों की प्रक्रिया

धार वनमंडल में 3 जुलाई को पांच निविदाएं जेम पोर्टल पर प्रकाशित की गईं। हैरान करने वाली बात यह रही कि निविदाएं जारी होते ही उसी दिन कुछ ही घंटों में आवेदन प्राप्त हुए, पात्रता परीक्षण भी कर लिया गया और रात में ठेका भी मंजूर कर लिया गया। इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, सूचना की गोपनीयता और तकनीकी पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया पूर्व-निर्धारित योजना के तहत एक ही ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई।

कंप्यूटर आईपी ऐड्रेस से उठे तकनीकी संदेह

शिकायतकर्ता हितेंद्र भावसार ने तकनीकी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट्स और कंप्यूटर लॉग के आधार पर आरोप लगाया है कि जिस कंप्यूटर से निविदाएं बनाई गईं, अपलोड की गईं और खोली गईं, वह संभवतः एक ही था। इसके आईपी ऐड्रेस और चयनित फर्म के आईपी ऐड्रेस में साम्यता पाई गई है। यह डिजिटल घोटाले की पुष्टि करने वाला बड़ा संकेत है। यही नहीं, निविदा में जमा की गई डीडी उस दिन की है जब बैंक बंद था – जो सीधे-सीधे कागजी हेरफेर की ओर इशारा करता है।

सीएफ को मिली ‘संरक्षण’ की चर्चा, जांच से बचाव की कोशिश

सूत्रों का कहना है कि धार के तत्कालीन सीएफ और डीएफओ के बीच गठजोड़ से यह पूरी प्रक्रिया संचालित हुई। इतना ही नहीं, सीएफ को उच्च स्तर पर कथित संरक्षण प्राप्त होने से निविदा रद्द तक नहीं की गई। हैरानी की बात यह है कि यह सारा मामला उजागर होने के बावजूद विभागीय स्तर पर तकनीकी जांच की बजाय सिर्फ पदस्थापन में बदलाव कर ‘शमन’ की कोशिश की जा रही है।

सांसद वीडी शर्मा ने किया था मामला उजागर

भारतीय जनता पार्टी के सांसद वीडी शर्मा ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और वन विभाग के एसीएस अशोक वर्णवाल से की थी। शिकायत में तकनीकी सबूतों सहित प्रक्रिया की गड़बड़ियों को विस्तार से बताया गया था। इसके बाद ही शासन ने कार्रवाई करते हुए धार के डीएफओ सोलंकी को हटाकर डीसीएफ, लघु वनोपज संघ (मुख्यालय) में पदस्थ कर दिया है।

फील्ड डायरेक्टर अंजना सुचिता तिर्की भी हटीं

इसी सूची में पन्ना टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर अंजना सुचिता तिर्की को हटाकर मुख्यालय अटैच किया गया है। हालांकि उनके स्थानांतरण के कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन यह स्थानांतरण भी राजनीतिक शिकायती पत्रों के परिप्रेक्ष्य में हुआ माना जा रहा है।

पदस्थापन सूची में प्रमुख बदलाव

  • धार के डीएफओ अशोक सोलंकी हटाए गए, स्थान पर विजयनंथम टी.आर. (दक्षिण बैतूल) को पदस्थ किया गया।
  • अंजना तिर्की, फील्ड डायरेक्टर, पन्ना – मुख्यालय अटैच।
  • रीवा, सिवनी, बुरहानपुर, शहडोल और अन्य वन वृत्तों में भी अधिकारियों की अदला-बदली की गई है।

तकनीकी फॉरेंसिक जांच की मांग तेज

विभागीय हलकों में यह मांग उठ रही है कि यह घोटाला केवल स्थानांतरण से नहीं सुलझेगा। चूंकि यह एक टेक्नोलॉजी आधारित धोखाधड़ी प्रतीत होती है, ऐसे में किसी स्वतंत्र तकनीकी समिति अथवा फॉरेंसिक आईटी विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई जानी चाहिए। यह मामला आने वाले समय में वन विभाग की साख और राज्य सरकार की पारदर्शिता नीतियों की अग्निपरीक्षा भी बन सकता है।