बाघ की संदिग्ध मौत और सबूत जलाने के मामले में डीएफओ पर उठे सवाल, कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में उठाया मुद्दा, डिप्टी रेंजर और वनरक्षक फरार
गणेश पाण्डेय, भोपाल। बालाघाट जिले के लालबर्रा परिक्षेत्र में मादा बाघ की संदिग्ध मौत और साक्ष्य मिटाने की कोशिशों ने वन विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। घटना के बाद जहां विभागीय स्तर पर जांच और निलंबन की कार्रवाई हो रही है, वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
जिले के चार कांग्रेस विधायकों—अनुभा मुंजारे (बालाघाट), संजय उइके (बैहर), विवेक पटेल (वारासिवनी) और मधु भगत (परसवाड़ा)—ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर दक्षिण बालाघाट डीएफओ अधर गुप्ता पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, उन्हें पद से हटाने और विधानसभा में यह मुद्दा उठाने की मांग की है।
विधायकों का आरोप है कि बाघ की हत्या को डीएफओ की जानकारी में ही अंजाम दिया गया और उसके शव को तीन अलग-अलग स्थानों पर जला दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुप्ता की जानकारी और संलिप्तता के बिना अधीनस्थ कर्मचारी ऐसा कृत्य नहीं कर सकते। इसके बावजूद कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर की गई।
संदेह और विवाद को बढ़ाते हुए डिप्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे फरार हो गए हैं। इस मामले में अब तक 5 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।
विधायकों ने यह भी दावा किया कि अधर गुप्ता पूर्व में शहडोल में भी विवादों में रहे हैं, जहां कमिश्नर ने उन्हें “मद्यपान का आदी” बताते हुए शासन को पत्र लिखा था।
वन बल प्रमुख बीएन अंबाड़े ने डीएफओ से मांगा स्पष्टीकरण, जबकि सीएफ गौरव चौधरी ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है।
अब पूरा प्रदेश इस सवाल पर नजरें टिकाए है—क्या वाकई किसी बाघ की हत्या को दबाने की साजिश हुई? और क्या जिम्मेदार अफसरों पर कठोर कार्रवाई होगी?
