गणेश पाण्डेय, भोपाल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के केंद्रीय क्षेत्र पीठ ने बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र में होने वाली कबीर दर्शन यात्रा पर सख्त रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश सरकार को तीन माह के भीतर नीति तैयार करने और उसे सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
NGT ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को आगे उपयुक्त मंच पर आवेदन करने का अधिकार होगा। इन निर्देशों के साथ मूल आवेदन संख्या 268/2024 (CZ) का निस्तारण कर दिया गया।
क्या है मामला?
यह याचिका पर्यावरण कार्यकर्ता अजय शंकर दुबे ने दायर की थी, जिसमें आरोप था कि बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र अधिकारी ने श्री सद्गुरु कबीर धर्मदास साहब वंशावली को “दर्शन यात्रा” की अनुमति दी, जो कोर क्षेत्र में आयोजित होनी थी।
आवेदक का कहना था कि:
- यह आयोजन वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करता है।
- टाइगर के संवेदनशील आवास और जैवविविधता को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
- पिछली यात्राओं में 14,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे, जिससे प्रदूषण, शोर, अव्यवस्थित ठहराव और बांस कटाई जैसी गतिविधियों से पर्यावरण को भारी क्षति हुई।
कोर क्षेत्र में आयोजन क्यों विवादित?
NGT और NTCA (नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी) का मानना है कि संरक्षित क्षेत्रों के कोर हिस्सों में बड़े धार्मिक आयोजनों से आवासीय विनाश होता है और यह प्रोजेक्ट टाइगर जैसी योजनाओं के उद्देश्य के विपरीत है।
सुनवाई में 27 नवंबर 2024 के PCCF (प्रधान मुख्य वन संरक्षक) के पत्र का उल्लेख हुआ, जिसमें कुछ शर्तों के साथ यात्रा की अनुमति दी गई थी। लेकिन 2022 में इन्हीं अधिकारियों ने ऐसे आयोजनों के नियमन की सिफारिश की थी।
वैज्ञानिक अध्ययन और सिफारिशें
राज्य सरकार ने जवाब में बताया कि:
- 6 जनवरी 2025 को बैठक के बाद वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने मार्ग की वहन क्षमता और प्रभाव का अध्ययन किया।
- डॉ. पराग निगम की रिपोर्ट में क्षमता 7,000–8,000 यात्रियों आंकी गई, लेकिन कठिन चढ़ाई, क्षतिग्रस्त मार्ग, और जंगली हाथी व बाघों की उपस्थिति के कारण इसे घटाकर 4,000–5,000 यात्रियों की सिफारिश की गई।
समिति की मुख्य सिफारिशें
- सभी यात्रियों का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य हो।
- पंजीकरण की सूचना आयोजकों और गुरुओं के माध्यम से कम से कम 1 माह पहले दी जाए।
- यात्रियों को केवल वाहनों के माध्यम से कबीर गुफा तक पहुँचने की अनुमति हो।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था अनिवार्य हो।अगला कदम
इन सिफारिशों को PCCF के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा गया है। अब NGT ने स्पष्ट कर दिया है कि तीन माह के भीतर नीति तय कर प्रकाशित की जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो भविष्य में ऐसे आयोजनों पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
