2025 में 23 वन अधिकारी होंगे रिटायर

2018 से नहीं हुआ कैडर रिव्यू, सुप्रीम स्तर के पद खाली, एपीसीसीएफ और सीसीएफ प्रमोशन की दौड़ में भी पात्र अफसर नहीं

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग का प्रशासनिक ढांचा इन दिनों बुरी तरह से चरमराया हुआ है। कारण है – वर्ष 2018 से लंबित पड़ा आईएफएस कैडर रिव्यू। नियमों के अनुसार 2018 और 2023 में कैडर रिव्यू होना था, लेकिन दोनों बार यह प्रक्रिया टल गई। अब संभावना जताई जा रही है कि अगले माह के अंत तक रिव्यू हो सकता है। इस देरी का सीधा असर यह है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) और मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) जैसे महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं और प्रमोशन के लिए योग्य अधिकारी तक नहीं मिल रहे।

खाली पद, बढ़ा बोझ

वर्तमान में एपीसीसीएफ के 25 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 6 अफसर ही काम कर रहे हैं। शेष 9 पद रिक्त हैं और एक्स कैडर के अतिरिक्त पद भी लंबित हैं। सीसीएफ के 50 पदों के मुकाबले केवल 13 अधिकारी ही कार्यरत हैं। इस वजह से एक-एक अधिकारी के पास 3 से 4 शाखाओं का अतिरिक्त प्रभार है। नतीजतन, विभाग का प्रशासनिक संतुलन बुरी तरह बिगड़ गया है।

कैडर रिव्यू का इतिहास

2002 में कैडर में पीसीसीएफ का 1, एपीसीसीएफ के 4 और एक्स कैडर में भी इतने ही पद थे। 2008 के रिव्यू में एपीसीसीएफ के 10 पद बढ़ाए गए। 2015 में एपीसीसीएफ के 21 पद स्वीकृत किए गए लेकिन एक्स कैडर समेत यह संख्या 50 तक पहुँच गई। धीरे-धीरे स्थिति यह बनी कि वरिष्ठता और सेवा-आर्हता के अभाव में प्रमोशन रुक गए और कैडर का ढांचा विकृत हो गया।

प्रमोशन की अटकी कतार

कई वर्षों से खाली पड़े एपीसीसीएफ पदों पर अब जनवरी 2026 में प्रमोशन की संभावना है। 2001 बैच की पदम् प्रिया और अमित दुबे इस स्तर पर पदोन्नत होंगे। वहीं 2012 बैच के बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षितिज कुमार, प्रियांशी सिंह, संजय चौहान, लवित भारती और महेंद्र प्रताप सिंह को वन संरक्षक (सीएफ) स्तर पर प्रमोशन मिलेगा।
गौर करने योग्य है कि महिला अधिकारी पदम् प्रिया की इंदौर सर्किल में पोस्टिंग लंबे समय से अटकी हुई है। विभाग में रिक्त सर्किल होने के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिला।

कैडर की खामियां और सुधार सुझाव

पूर्व वन बल प्रमुख ने सुझाव दिया है कि अनावश्यक शाखाओं को समाप्त कर ढांचे को संतुलित किया जाए। जैसे – एपीसीसीएफ उत्पादन, निगरानी एवं मूल्यांकन, एचआरडी जैसी शाखाओं का कोई औचित्य नहीं है। इसी तरह सामाजिक वानिकी और अनुसंधान-प्रसार के सीसीएफ स्तर के पदों को समाप्त कर, वहाँ वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की पदस्थापना की जा सकती है।

स्थिति क्यों बिगड़ी?

वन विभाग के विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रशासनिक ढांचा बिगड़ने की एक बड़ी वजह आईएफएस इंडक्शन की कमी है। भारत सरकार द्वारा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस की परीक्षा एक साथ कराए जाने से बॉटनी विषय के अभ्यर्थी पिछड़ गए और आईएफएस में चयन घटकर सालाना केवल 5 से 7 रह गया। राज्य सरकार 2010 से लगातार केंद्र को लिख रही है कि मप्र को हर साल कम से कम 10–12 अभ्यर्थी दिए जाएं, लेकिन मांग पर अमल नहीं हुआ।

कैडर प्रस्ताव केंद्रीय कार्मिक विभाग में लंबित

वर्तमान में कैडर रिव्यू का संशोधित प्रस्ताव केंद्रीय कार्मिक विभाग में अटका है। विभाग ने 2023 में इसे वापस एमपी को सुधार के लिए लौटाया था। इसमें वरिष्ठ पदों की संख्या घटाने का सुझाव दिया गया है –

पद वर्तमान प्रस्तावित
वन बल प्रमुख (HOF) 01 0
एपीसीसीएफ 25 18
सीसीएफ 50 33
सीएफ 40 30

(ये बदलाव केवल सीनियर पदों पर लागू होंगे)

आईएफएस कैडर में देरी से हो रहा रिव्यू विभाग के प्रशासनिक ढांचे को तोड़ चुका है। रिक्त पद, प्रमोशन का अभाव और अतिरिक्त प्रभार ने व्यवस्था को कमजोर बना दिया है। अब निगाहें अगले माह संभावित कैडर रिव्यू पर टिकी हैं, जो विभाग की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने का एकमात्र विकल्प माना जा रहा है।