वन विभाग के अनावश्यक हस्तक्षेप पर लगी रोक
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक और बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि भूमि पर लगे पेड़ों की कटाई को लेकर नई नीति लागू कर दी है। इस फैसले के तहत अब किसान अपने खेतों में लगे पेड़ों की कटाई की अनुमति ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। वन विभाग की जटिल प्रक्रिया और लंबी सरकारी औपचारिकताओं से किसानों को अब राहत मिल जाएगी।
सरकार ने इस नई व्यवस्था को “कृषि भूमि पर वृक्ष कटाई अनुमति नियम – 2025” के रूप में लागू किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि “सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। यह निर्णय उसी दिशा में एक ठोस कदम है।”
🌳 क्यों जरूरी था नया नियम?
पहले किसानों को अपने खेत के पेड़ काटने के लिए वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती थी, जिसमें समय और प्रयास दोनों लगते थे। कई बार अधिकारी जांच में देरी करते थे, जिससे किसान लकड़ी की बिक्री या नई फसल की तैयारी नहीं कर पाते थे। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।
सरकार का उद्देश्य है कि किसान अपनी भूमि पर अधिक से अधिक पेड़ लगाएं — जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी हो। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पेड़ लगाने से “भूमि की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण होता है और किसान को लकड़ी से अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।”
🌾 किसानों को कैसे मिलेगा लाभ
नए नियम के तहत किसानों को पेड़ काटने की अनुमति के लिए “नेशनल टिम्बर मैनेजमेंट सिस्टम (NTMS)” पोर्टल पर आवेदन करना होगा।
- किसान या जमीन मालिक अपनी भूमि का विवरण (खसरा नंबर, गांव, जिला) भरेंगे।
- लगाए गए पेड़ों की संख्या, ऊंचाई और फोटो अपलोड करनी होगी।
- आवेदन के बाद सिस्टम स्वचालित रूप से सत्यापन करेगा।
यदि 10 या उससे कम पेड़ काटने हैं, तो केवल फोटो अपलोड करने पर अनुमति मिल जाएगी।
अगर 10 से अधिक पेड़ हैं, तो सरकार की अधिकृत एजेंसी खेत का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट के बाद “फेलिंग परमिट” जारी किया जाएगा।
पेड़ काटने के बाद किसानों को ठूंठ (stump) की फोटो अपलोड करनी होगी, जिससे सत्यापन पूरा हो सके।
💰 लकड़ी बेचने पर कोई रोक नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुमति प्रक्रिया पूरी करने के बाद किसान अपनी लकड़ी किसी भी बाजार या उद्योग को स्वतंत्र रूप से बेच सकते हैं। इससे अब उन्हें बिचौलियों या स्थानीय वन विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
लकड़ी उद्योग से किसानों का सीधा संपर्क बनेगा और उन्हें अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। सरकार का अनुमान है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और राज्य में वुड बेस्ड इंडस्ट्री को नया आयाम मिलेगा।
🏛️ कौन करेगा निगरानी?
इस पूरे ऑनलाइन सिस्टम की निगरानी राज्य स्तरीय समिति (State Level Committee) और वन विभाग करेगा। प्रत्येक जिले के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) आवेदन और रिपोर्ट की जांच करेंगे।
सरकार ने किसानों को यह भी चेतावनी दी है कि बिना अनुमति पेड़ काटने पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। इसलिए सभी जानकारी पोर्टल पर सही और पूरी तरह से दर्ज करना आवश्यक होगा।
🌱 मुख्यमंत्री की मंशा – “किसान बने वृक्ष संपन्न”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि “हर खेत हरा हो, हर किसान समृद्ध हो।”
उन्होंने बताया कि पेड़ केवल पर्यावरण की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। पेड़ लगाने और काटने की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाना सरकार की “ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार का यह निर्णय न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि पेड़ आधारित उद्योगों को भी नई ऊर्जा देगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह पहल “हरित अर्थव्यवस्था” की दिशा में एक प्रेरक कदम साबित हो सकती है। अब किसान अपनी ज़मीन के सच्चे मालिक बनकर पेड़ लगाएँगे, काटेंगे और उसका लाभ भी स्वयं उठाएँगे — “खेती के साथ वृक्षारोपण, दोनों से समृद्धि का समाधान।”
