2025 में 23 वन अधिकारी होंगे रिटायर

डीएफओ पर अभी तक नहीं हुई कोई कारवाई, सीसीएफ ने की हॉफ के पत्र की अनदेखी

गणेश पाण्डेय, भोपाल। नर्मदापुरम वन मंडल में एक के बाद एक गंभीर अनियमितताओं के खुलासे से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले जहां गोल्डन टीक (सागौन) की अवैध कटाई से ढाई करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ था, वहीं अब वर्किंग प्लान के विपरीत कूप कटाई की गड़बड़ी सामने आई है।

वन बल प्रमुख वी.एन. अंबाड़े और एपीसीसीएफ (प्रोटेक्शन) विभाष ठाकुर द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद डीएफओ मयंक गुर्जर और अधीनस्थ अधिकारियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।

वर्किंग प्लान से इतर कूप कटे, अवैध कटाई की श्रेणी में मामला

सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार से 2025 में कूप क्रमांक 2 (बैलगाड़ा) की कटाई की अनुमति प्राप्त हुई थी, लेकिन नर्मदापुरम वन मंडल के अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए कूप क्रमांक 3 की कटाई कर दी।
यह कदम वर्किंग प्लान की शर्तों का उल्लंघन है और वन अपराध की श्रेणी में आता है।
वन विभाग के विद्वान अधिकारियों द्वारा तैयार की गई 10 वर्षीय वर्किंग प्लान को पूरी तरह दरकिनार कर यह कटाई की गई।

हैरानी की बात यह है कि संबंधित अधिकारी अब उस कूप की कटाई न होने के बावजूद “पुनरुत्पादन योजना” (Regeneration Plan) बनाकर मुख्यालय को भेज चुके हैं और लाखों रुपए का बजट भी स्वीकृति के लिए मांगा गया है।

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सीसीएफ, डीएफओ और एसडीओ की लापरवाही उजागर

वर्किंग प्लान के अनुसार किसी भी कूप की कटाई से पहले वरिष्ठ अधिकारियों — सीसीएफ, डीएफओ और एसडीओ — द्वारा स्थल पर जाकर मार्किंग कार्य का निरीक्षण अनिवार्य होता है।
नियम के मुताबिक:

  • परिक्षेत्र अधिकारी को सभी कूपों की मार्किंग करनी होती है,
  • उपवनमंडलाधिकारी को 50% कूपों,
  • और वनमंडलाधिकारी को 10% कूपों का निरीक्षण करना होता है।

लेकिन नर्मदापुरम वन मंडल में न तो मार्किंग का डिमॉन्स्ट्रेशन हुआ, न निरीक्षण।
परिणामस्वरूप कूप क्रमांक 2 की जगह 3 काट दिया गया, जो पूर्ण रूप से वर्किंग प्लान उल्लंघन है।

गोल्डन टीक कटाई का मामला भी दबा

नर्मदापुरम सर्किल के छीपीखापा बीट में पिछले एक वर्ष में गोल्डन टीक की अवैध कटाई से विभाग को लगभग ढाई करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
फिर भी न तो डीएफओ मयंक गुर्जर के खिलाफ चार्जशीट जारी की गई और न किसी अन्य अधिकारी पर कार्रवाई हुई।
पीसीसीएफ (प्रोटेक्शन) विभाष ठाकुर ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव वन और वन बल प्रमुख को लिखित शिकायत भेजी थी, परंतु फाइल दबा दी गई।

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पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल की भूमिका पर सवाल

अब नए विवाद में पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल की भूमिका पर भी उंगली उठ रही है।
जब वे पीसीसीएफ प्रोटेक्शन थे, उसी दौरान छीपीखापा बीट में सागौन की अवैध कटाई होती रही, पर उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
सेवानिवृत्त एसडीओ मधुकर चतुर्वेदी ने 2024 में दस्तावेजों के साथ शिकायत की थी, लेकिन उसे भी नजरअंदाज किया गया।

अब अग्रवाल पीसीसीएफ वर्किंग प्लान और केम्पा के पद पर हैं, और इसी दौरान कूप कटाई में गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
उन पर पहले भी विवादों का साया रहा है — हॉर्टिकल्चर विभाग में बीज खरीदी घोटाले के दौरान उन पर 2023 में आरोप पत्र जारी हुआ था, और तत्कालीन प्रमुख सचिव कल्पना श्रीवास्तव ने उनकी सीआर ‘घ’ श्रेणी में दी थी।

नियमानुसार क्या होना चाहिए था

वर्किंग प्लान के चयन सह सुधार कार्य वृत्त में सभी आयु वर्ग के वृक्ष पाए जाते हैं, इसलिए मार्किंग में अत्यधिक सावधानी और प्रशिक्षण आवश्यक है।
नियमों के तहत:

  • मार्किंग कार्य शुरू होने से पहले सीसीएफ या डीएफओ को प्रदर्शन कूप में जाकर डिमॉन्स्ट्रेशन देना होता है।
  • श्रमिकों और मार्किंग अफसरों को प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
    लेकिन नर्मदापुरम में इन सभी प्रावधानों की पूरी तरह अनदेखी की गई।

प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ा भ्रष्टाचार

वन मंडल के भीतर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और उच्चस्तरीय ढिलाई से अब पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है।
सीसीएफ और डीएफओ स्तर पर कार्यवाही न होने से निचले अधिकारी बेलगाम होकर नियमों की अवहेलना कर रहे हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि उच्चस्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में वन क्षेत्र में अवैध कटाई और बजट दुरुपयोग की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

नर्मदापुरम वन मंडल में लगातार हो रहे घोटाले और गड़बड़ियां यह संकेत दे रही हैं कि विभाग में नियंत्रण और जवाबदेही की कमी गहरी हो चुकी है।
गोल्डन टीक की अवैध कटाई से लेकर कूप क्रमांक की गड़बड़ी तक, हर स्तर पर नियमों का उल्लंघन और लापरवाही दिख रही है।
अगर शासन ने समय पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला मध्यप्रदेश वन विभाग के इतिहास में एक बड़े प्रशासनिक घोटाले के रूप में दर्ज हो सकता है।