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गणेश पाण्डेय, भोपाल। भोपाल के बड़े तालाब वेटलैंड क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने नगर निगम (BMC) को निर्देश दिया है कि वह पूर्व आदेशों के अनुसार सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाने और कार्यवाही की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करे।

मामला “राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर, भोपाल एवं अन्य (O.A. No. 12/2025)” की सुनवाई के दौरान सामने आया। इस मामले की सुनवाई माननीय न्यायिक सदस्य जस्टिस श. ई. ओ. कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने की।

सुनवाई के दौरान NGT की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब एक पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील वेटलैंड क्षेत्र है, जहाँ किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या निर्माण कार्य न केवल पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करता है बल्कि वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का उल्लंघन भी है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के प्रतिनिधि ने ट्रिब्यूनल को बताया कि वेटलैंड नियमों के अनुसार प्रतिबंधित, नियंत्रित और विनियमित गतिविधियों का अनुपालन सुनिश्चित कराना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को भी आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

आवेदक की दलील — BMC ने नहीं दी स्पष्ट जानकारी

आवेदक पक्ष के अधिवक्ता राशिद नूर खान ने दलील दी कि ट्रिब्यूनल के 07 अक्टूबर 2025 के आदेश के पैरा 18 में जिन अतिक्रमणों का विवरण दिया गया था, उन पर भोपाल नगर निगम ने अब तक कोई स्पष्ट जवाब या रिपोर्ट पेश नहीं की है।

उनका कहना था कि वेटलैंड क्षेत्र में लगातार निर्माण और अतिक्रमण जारी हैं, जिससे पर्यावरणीय क्षति हो रही है। इसके बावजूद निगम ने ठोस कार्यवाही नहीं की है।

नगर निगम का पक्ष

भोपाल नगर निगम (BMC) की ओर से कहा गया कि जिन व्यक्तियों पर अतिक्रमण के आरोप हैं, उन्हें नोटिस जारी कर दिए गए हैं और प्रक्रिया नियमों के अनुसार प्रगति पर है। निगम का यह भी कहना था कि फील्ड सर्वे के बाद संबंधित स्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।

हालाँकि, ट्रिब्यूनल ने नगर निगम की धीमी कार्यवाही और पूर्व आदेशों के पालन में देरी पर असंतोष व्यक्त किया और स्पष्ट कहा कि “अब बहाने नहीं, ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है।”

NGT के मुख्य निर्देश

ट्रिब्यूनल ने भोपाल नगर निगम को निर्देश दिया कि —

  1. पूर्व आदेशों का अक्षरश: पालन किया जाए।
  2. बड़े तालाब वेटलैंड क्षेत्र में सभी अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं।
  3. वेटलैंड नियमों, 2017 को पूरी सख्ती से लागू किया जाए।
  4. पूरा क्षेत्र अतिक्रमण-मुक्त घोषित करने की दिशा में कार्रवाई हो।

NGT ने यह भी कहा कि निगम दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत एक्शन टेकेन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करे, जिसमें अतिक्रमण हटाने, नोटिस जारी करने और की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी हो।

अगली सुनवाई 12 नवंबर को

ट्रिब्यूनल ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर 2025 को सूचीबद्ध किया है। उस दिन निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अद्यतन रिपोर्ट और प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नगर निगम ने इस बार NGT के निर्देशों का पालन नहीं किया तो इस मामले में कड़ी दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल संरक्षण के दृष्टिकोण से यह मामला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।