आईबीएन, नई दिल्ली। देश में शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी चल रही है। एनसीईआरटी (NCERT) ने फैसला किया है कि अब स्कूलों के सिलेबस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (CT) को तीसरी कक्षा से ही शामिल किया जाएगा। वहीं कक्षा 6 से 8 तक के साइंस करिकुलम में आयुर्वेद के चैप्टर जोड़े जाएंगे। ये बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पूरे देश के स्कूलों में लागू होंगे।
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर तैयार करेंगे एआई सिलेबस
एनसीईआरटी ने यह कदम नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत उठाया है, ताकि बच्चों को भविष्य की टेक्नोलॉजी के साथ जल्दी जोड़ा जा सके। इस पहल के लिए सीबीएसई, एनसीईआरटी, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति मिलकर काम कर रहे हैं। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर कार्तिक रमन के नेतृत्व में एक विशेष समिति गठित की गई है, जो तीसरी कक्षा के लिए एआई और सीटी का सिलेबस तैयार करेगी। अधिकारियों के अनुसार, इसमें बच्चों को केवल टेक्निकल ज्ञान ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि एआई से जुड़ी सामाजिक और नैतिक समझ भी सिखाई जाएगी। स्कूलों में इसे लागू करने के लिए एक नेशनल इंप्लीमेंटेशन कमेटी बनेगी, जो टीचर्स की ट्रेनिंग और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराएगी।
कक्षा 6 से 8 में पढ़ाया जाएगा आयुर्वेद
नई शिक्षा नीति के अनुरूप, कक्षा 6 से 8 तक की साइंस की किताबों में अब आयुर्वेद जोड़ा जाएगा। एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरणीय संतुलन की समझ देना है। कक्षा 6 की किताबों में फंडामेंटल प्रिंसिपल्स ऑफ आयुर्वेद अध्याय जोड़ा जाएगा, जिसमें आयुर्वेद की 20 खूबियों और गर्म-ठंडा, हल्का-भारी जैसे परंपरागत सिद्धांतों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया जाएगा।
8वीं की किताबों में पहले ही बदले गए मुगलकाल के चैप्टर
इससे पहले एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताबों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। अब किताबों में मुगल काल की नई समीक्षा जोड़ी गई है, जिसमें शासकों के धार्मिक निर्णय, सांस्कृतिक योगदान और अत्याचार से जुड़ी घटनाओं का विस्तृत वर्णन है। 2025-26 सत्र से ये नई किताबें स्कूलों में लागू की जा चुकी हैं।
एनसीईआरटी ने कहा- इतिहास की जड़ों को जानना जरूरी
एनसीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार, इतिहास की घटनाओं को नकारा नहीं जा सकता। सत्ता की लालसा और अत्याचार की जड़ों को समझना ही ऐसा भविष्य बनाने का रास्ता है, जहां वैसी गलतियां दोबारा न हों। किताबों में अब बनारस, मथुरा और सोमनाथ के मंदिरों पर हमलों से लेकर जैन, सिख, सूफी और पारसी समुदायों पर अत्याचार की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
देश की शिक्षा व्यवस्था में नये युग की शुरुआत
विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीईआरटी का यह निर्णय भारतीय शिक्षा प्रणाली को तकनीक और परंपरा के समन्वय की दिशा में आगे ले जाएगा। एक तरफ बच्चे भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार होंगे, तो दूसरी ओर भारतीय ज्ञान परंपरा को भी आधुनिक शिक्षा में उचित स्थान मिलेगा।
