वन प्रबंधन और वन्यजीव सुरक्षा प्रभावित; मुख्यालय के आदेश पर खुद मुख्यालय ही नहीं कर रहा अमल
गणेश पाण्डेय, भोपाल। वन बल प्रमुख वी.एन. अंबाड़े के एक लिखित आदेश ने प्रदेश के मैदानी वन अधिकारियों को उलझन में डाल दिया है। 1 नवंबर को जारी निर्देश में कहा गया था कि प्रत्येक सोमवार या मंगलवार को मुख्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंस (VC) आयोजित की जाएगी। उद्देश्य था—साप्ताहिक समीक्षा और समन्वय को सुव्यवस्थित करना।
लेकिन निर्धारित दिनों के अलावा भी लगातार VC बुलाए जाने से फील्ड अधिकारियों का कार्य भारी रूप से प्रभावित हो रहा है। एक VC की तैयारी, डाटा संकलन और प्रस्तुतीकरण में दो से तीन दिन लग जाते हैं। इससे वे फील्ड में समय नहीं दे पा रहे, जिसका सीधा असर वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और वन अपराध नियंत्रण पर पड़ रहा है।
मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी नहीं मान रहे आदेश
स्थिति को और जटिल यह बना रही है कि स्वयं मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी निर्धारित दिनों का पालन नहीं कर रहे।
- 21 और 26 नवंबर को पीसीसीएफ स्तर से VC आयोजित हुईं।
- FCA से संबंधित बैठकों में भी बिना तय समय के VC आयोजित की जा रही हैं।
इससे विभाग के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि क्या वन बल प्रमुख के आदेश की प्रभावशीलता कम हो रही है?
DFO की जिम्मेदारियाँ व्यापक, VC से फील्ड विजिट घटे
एक डिवीजनल फ़ॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) को बड़े भू-भाग में फैले जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी होती है। उनके प्रमुख कार्य हैं—
- अवैध कटाई, अतिक्रमण और शिकार पर नियंत्रण
- वन्यजीवों के आवास का संरक्षण
- वृक्षारोपण और नर्सरी संचालन
- मानव–वन्यजीव संघर्ष मामलों में तुरंत राहत
- संयुक्त वन प्रबंधन समितियों का संचालन
- वन अधिकार अधिनियम से जुड़े दायित्व
- विभिन्न विकास योजनाओं का अनुश्रवण
लगातार VC के कारण DFO का फील्ड भ्रमण घट गया है, जिससे कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
महकमे में बढ़ती बेचैनी
मैदानी अधिकारियों का कहना है कि यदि VC को तय दिन और समय में सीमित न किया गया, तो फील्ड कार्य और बाधित होगा। विभाग के भीतर यह भी चर्चा है कि नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी से कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वर्तमान परिस्थितियों ने विभाग में यह बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—
“क्या मुख्यालय अपने ही आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू कर पा रहा है?”
