2025 में 23 वन अधिकारी होंगे रिटायर

पीसीसीएफ प्रशासन विवेक जैन को करनी पड़ी व्हाट्सएप अपील, कई DFO ने एसीएफ को भारमुक्त करने से किया इंकार

गणेश पाण्डेय, भोपाल वन विभाग में हाल ही में किए गए सहायक वन संरक्षक (ACF) और रेंजर स्तर के तबादलों के बाद विभाग के भीतर प्रशासनिक समन्वय की कमी स्पष्ट रूप से सामने आई है। बिना समुचित तैयारी और आंतरिक संतुलन का ध्यान रखे किए गए इन तबादलों के कारण कुछ वनमंडल ACF विहीन हो गए हैं। विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों को अब स्थानांतरित अधिकारियों की तैनाती और रिक्त पदों के बीच संतुलन साधने के लिए प्रयास करना पड़ रहा है।

विभाग के प्रशासनिक-एक शाखा के प्रमुख, पीसीसीएफ विवेक जैन को स्थिति स्पष्ट करने के लिए वन अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश जारी करना पड़ा कि, “यदि किसी वनमंडल में समस्त उपवनमंडल रिक्त हो गए हैं, तो तत्काल मेरे फोन पर विवरण भेजें।” इसके साथ ही मुख्यालय में पदस्थ उनके सहायक को भी निर्देश दिए गए कि वे वनमंडलों से जानकारी संकलित करें और संबंधित डीएफओ से बात कर स्थानांतरित अधिकारियों को यथाशीघ्र भारमुक्त करने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

प्रशासनिक पूर्व-आकलन की अनदेखी

वन विभाग के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की स्थिति सामान्यत: तब उत्पन्न होती है जब स्थानांतरण पूर्व समुचित प्रशासनिक आकलन नहीं किया जाता। विभाग के एक सेवानिवृत्त पीसीसीएफ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, “तबादलों से पूर्व आमतौर पर यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी वनमंडल के सभी उपवनमंडल एकसाथ रिक्त न हो जाएं। इससे विभागीय कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है।” उनका मानना है कि यह स्थिति एक प्रशासनिक असंतुलन का संकेत है, जिससे भविष्य में कार्यदक्षता पर असर पड़ सकता है।

मैदानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया और आपत्तियाँ

मालवा क्षेत्र के कुछ डीएफओ ने अपने मंडलों में एकमात्र पदस्थ ACF को भारमुक्त करने से इनकार कर दिया है। इंदौर वनमंडल का उदाहरण सामने आया है, जहां दोनों ACF का स्थानांतरण कर दिया गया है, जिसके कारण अब रालामंडल के अधीक्षक को इंदौर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। स्थानीय स्तर पर यह निर्णय कई अधिकारियों को असहज कर गया है।

सूत्रों के अनुसार, इंदौर में एक अधिकारी का स्थानांतरण केवल इस कारण कर दिया गया कि वह हाल में हुई एक कार्यशाला के दौरान अधिकारियों की अपेक्षा अनुसार व्यवस्थाएं नहीं कर सका था।

स्थानांतरण नीति के मानकों का उल्लंघन

वन विभाग के इस तबादला अभियान में राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति के कई मानकों का पालन नहीं किया गया। विशेष रूप से पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पदस्थापना जैसे मानवीय प्रावधानों की अनदेखी की गई। उदाहरण के लिए, रीवा सर्कल में कार्यरत अधिकारी विद्या भूषण मिश्रा का तबादला खरगोन कर दिया गया, जबकि उनकी पत्नी रीवा में शासकीय सेवा में कार्यरत हैं। रीवा में दो एसडीओ के पद रिक्त हैं, फिर भी उन्हें वहां से हटाकर तुरंत भारमुक्त कर दिया गया और उनका प्रभार एक रेंजर को सौंप दिया गया, जो पहले से दो उपमंडलों का भार संभाल रहे हैं।

मुख्यालय में वर्षों से जमे कर्मचारी और अधिकारियों पर भी उठे सवाल

रेंजर संगठन के एक व्हाट्सएप समूह में यह मुद्दा भी उठा है कि क्या स्थानांतरण नीति केवल फील्ड में कार्यरत वर्दीधारी कर्मियों के लिए ही है? सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय में संरक्षण, वित्त, प्रशासन, कैम्पा और HRD जैसी शाखाओं में वर्षों से जमे अधिकारी, ACF और बाबुओं का वर्षों से न तो ट्रांसफर हुआ है और न ही किसी ने इसकी पहल की है। कई शाखाओं में कंप्यूटर ऑपरेटर न केवल कार्यों का संचालन कर रहे हैं, बल्कि कथित रूप से उच्चाधिकारियों के नाम पर फील्ड कर्मचारियों से आर्थिक लेनदेन करने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में वाहनों के पंजीयन के नाम पर धन वसूली के प्रकरणों की भी चर्चा है।

फील्ड बनाम मुख्यालय: संतुलन जरूरी

वन विभाग जैसी संरचना में फील्ड स्तर की संरचनात्मक मजबूती और प्रशासनिक नियंत्रण का तालमेल अत्यंत आवश्यक होता है। लेकिन हालिया तबादलों से स्पष्ट होता है कि योजनाबद्धता और पारदर्शिता की कमी से फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। फील्ड से लेकर मुख्यालय तक समान मापदंड अपनाना और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना ही विभाग की साख को बनाए रखने का आधार है।