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वन विकास निगम की नई रणनीति, 15 साल में 90 करोड़ से अधिक आय का अनुमान

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश अब केवल साल और सागौन जैसी बहुमूल्य वनोपज के लिए ही नहीं, बल्कि चंदन वृक्षों के उत्पादन के लिए भी राष्ट्रीय पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य वन विकास निगम ने वित्तीय संक्रमण से उबरने और आय में वृद्धि के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर चंदन वृक्षारोपण की विशेष योजना तैयार की है। इसकी शुरुआत बैतूल जिले में 10 हेक्टेयर भूमि पर चंदन रोपण से की जा चुकी है। निगम के आकलन के अनुसार, इस परियोजना से 15 वर्षों में 90 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है।

एच.यू. खान, प्रबंध संचालक, राज्य वन विकास निगम
एच.यू. खान, प्रबंध संचालक, राज्य वन विकास निगम

राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक एच.यू. खान ने बताया कि सफेद चंदन मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों—विशेषकर सिवनी, छिंदवाड़ा, भोपाल और सागर—में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह प्रजाति व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे प्राप्त सुगंधित काष्ठ और तेल की बाजार में उच्च मांग होने के कारण अच्छा आर्थिक लाभ संभव है।

2027 तक 50 हजार चंदन पौधे तैयार करने का लक्ष्य

वन विकास निगम ने चंदन उत्पादन को दीर्घकालिक योजना के रूप में अपनाया है। निगम प्रबंधन के अनुसार वर्ष 2027 में लगभग 50 हजार चंदन पौधे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे पहले वर्ष 2025 में तत्कालीन एमडी वी.एन. अंबाड़े के कार्यकाल में रामपुर-भतोड़ी परियोजना मंडल में 10 हेक्टेयर क्षेत्र में चंदन रोपण कराया गया था।

मौजूदा एमडी एच.यू. खान ने बताया कि आगामी दो वर्षों में निगम के सभी परियोजना मंडलों में चंदन रोपण का विस्तार किया जाएगा। इसी क्रम में वर्ष 2026 में छिंदवाड़ा और सिवनी परियोजना मंडलों में 10-10 हेक्टेयर क्षेत्र में 5-5 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही लावाघोघरी रोपणी (छिंदवाड़ा) को चंदन उत्पादन की मानक नर्सरी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कर्नाटक और केरल से लाए गए उच्च गुणवत्ता के पौधे

चंदन पौधों की प्रारंभिक वृद्धि के लिए मेजबान प्रजाति (Host Species) का होना आवश्यक होता है। वर्ष 2025 में किए गए रोपण के लिए कर्नाटक के कोलार डिवीजन से उच्च गुणवत्ता के पौधे लाए गए थे। वहीं, वर्तमान में लावाघोघरी रोपणी में तैयार किए जा रहे चंदन पौधों के लिए केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (केएफआरआई), त्रिशूर से उच्च गुणवत्ता के बीज प्राप्त किए गए हैं। भविष्य में भी इसी रोपणी को बड़े पैमाने पर चंदन उत्पादन का केंद्र बनाया जाएगा।

10 हेक्टेयर से 35 करोड़ तक राजस्व की संभावना

चंदन वृक्षों का विदोहन 12 से 15 वर्षों के बाद किया जाता है। निगम के अनुसार, 10 हेक्टेयर क्षेत्र से 30 से 35 करोड़ रुपये तक की आय संभावित है। चंदन का विदोहन सागौन वृक्षों के साथ किए जाने से रोपित पौधों को नुकसान नहीं होगा।
चंदन की हार्ट वुड की बाजार कीमत लगभग 9,000 रुपये प्रति किलो है। 15 वर्षों में वृक्ष की गोलाई 45–50 सेमी तक हो जाती है, जिससे कम समय में अधिक आर्थिक लाभ संभव होता है।

प्रति हेक्टेयर लगभग 500 पौधों के हिसाब से 10 हेक्टेयर में 5,000 पौधों की आवश्यकता होती है। रोपण, रख-रखाव और सुरक्षा पर 15 वर्षों में करीब 63 लाख रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। चंदन वृक्षारोपण की यह पहल मध्यप्रदेश को वन आधारित अर्थव्यवस्था में नई मजबूती देगी और राज्य को उच्च मूल्य वनोपज के एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।