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गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के शुजालपुर क्षेत्र में खेतों में भटक रहे 45 काले हिरणों को वन विभाग ने अत्याधुनिक ‘बोमा कैप्चर तकनीक’ की मदद से सुरक्षित रूप से पकड़कर गांधीसागर सेंचुरी में स्थानांतरित किया है। यह तकनीक दक्षिण अफ्रीका से लाई गई है और भारत में पहली बार इसका उपयोग किया गया है। इस विशेष अभियान में हेलीकॉप्टर की सहायता से हिरणों को बिना किसी हानि के पकड़ा गया।

वन विभाग ने इस अभियान को दीपावली के दिन अंजाम दिया, ताकि खेतों में घूम रहे काले हिरणों से फसलों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। अभियान के दौरान दक्षिण अफ्रीका से आई विशेषज्ञ टीम ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विभाग का यह कदम न केवल किसानों के लिए राहत देने वाला है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी मानी जा रही है।

कैसे किया गया ऑपरेशन

एपीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) एल. कृष्णमूर्ति के अनुसार, सभी 45 काले हिरण शुजालपुर के इमलीखेड़ा गांव से पकड़े गए। हेलीकॉप्टर की सहायता से हिरणों को घेरकर दक्षिण अफ्रीकी बोमा तकनीक के तहत उन्हें विशेष ट्रैप एरिया में लाया गया। इसके बाद उन्हें ट्रकों से गांधीसागर सेंचुरी के घास के विस्तृत मैदानों में छोड़ा गया।
उन्होंने बताया कि पूरे अभियान के दौरान किसी भी वन्यजीव को चोट या नुकसान नहीं पहुंचा। आगे चलकर जिले में 400 काले हिरण और 100 नीलगाय को भी इसी तकनीक से सुरक्षित रूप से पकड़े जाने की योजना है।

क्यों किया गया यह अभियान

शुजालपुर क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वर्तमान में यहां लगभग 20 हजार काले हिरण और 2 हजार नीलगायें पाई जाती हैं। ये वन्यजीव अक्सर खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक हानि होती है।
वन विभाग के अनुसार, इन हिरणों को गांधीसागर सेंचुरी में शिफ्ट करने से उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास मिलेगा और किसानों को फसल सुरक्षा के रूप में राहत मिलेगी।

कहां छोड़े गए हिरण

गांधीसागर सेंचुरी के सुप्रिटेंडेंट संजय रायखेरे ने बताया कि हिरणों को सेंचुरी के घास के मैदान वाले खुले क्षेत्रों में छोड़ा गया है, जो चीता और तेंदुए जैसे शिकारी जीवों के क्षेत्रों से पूरी तरह अलग है।
उन्होंने कहा कि सेंचुरी में इन हिरणों के लिए पर्याप्त जल स्रोत और प्राकृतिक भोजन उपलब्ध है, जिससे वे सुरक्षित और संतुलित पारिस्थितिकी में रह सकेंगे।

बोमा तकनीक क्या है?

बोमा कैप्चर तकनीक’ दक्षिण अफ्रीका में विकसित की गई एक आधुनिक पद्धति है, जिसका उपयोग बड़े समूहों में वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से पकड़ने और स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है।
इसमें हेलीकॉप्टर की मदद से जानवरों को धीरे-धीरे जाल या बंद घेरों (बोमा) की ओर हांकते हैं। फिर बिना बेहोश किए या चोट पहुंचाए उन्हें पकड़ा जाता है।
इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य है—

  • वन्यजीवों को तनाव-मुक्त तरीके से पकड़ना,
  • सुरक्षित स्थानांतरण,
  • और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना।

मानव-वन्यजीव संघर्ष समाधान की दिशा में कदम

वन विभाग का यह कदम मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में फसल सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि बोमा तकनीक से न केवल जानवरों को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि किसानों की आजीविका भी संरक्षित रहेगी। यह अभियान भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

शुजालपुर के खेतों से गांधीसागर सेंचुरी तक की यह पहल वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयोग साबित हुई है। इससे एक ओर जहां किसानों की फसलें सुरक्षित रहेंगी, वहीं दूसरी ओर काले हिरणों को नया प्राकृतिक घर मिलेगा।
दक्षिण अफ्रीका की तकनीक और भारतीय वन विभाग के समन्वय से किया गया यह अभियान आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण की नई मिसाल बन सकता है।