डीएफओ की निष्क्रियता पर उठे सवाल, पीसीसीएफ संरक्षण ने मांगा जवाब
356 सागौन वृक्षों की अवैध कटाई, नुकसान 1.55 करोड़ का, सीएफ-डीएफओ पर कार्रवाई क्यों नहीं?
गणेश पाण्डेय, भोपाल। नर्मदापुरम वन मंडल की इटारसी रेंज के पांडरी वन क्षेत्र (RF-112) में 356 सागौन वृक्ष अवैध रूप से काटे जाने का मामला सामने आया है। उड़नदस्ता दल की रिपोर्ट के अनुसार, यह कटाई लगभग 1 करोड़ 55 लाख रुपये मूल्य की “सागौन गोल्ड वुड” की है।

पूर्व वन अधिकारी मधुकर चतुर्वेदी ने इस मामले की शिकायत एसीएस अशोक वर्णवाल, तत्कालीन वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और संरक्षण प्रमुख मनोज अग्रवाल तक की। लेकिन, न तो सीएफ नर्मदापुरम और न ही डीएफओ मयंक गुर्जर पर कार्रवाई हुई। आरोप है कि डीएफओ ने मामले को दबाने के लिए अपराध प्रकरणों को टुकड़ों में दर्ज कर नुकसान कम आंका।

निरीक्षण डायरी में तेंदुए-बाघ के पदचिन्ह, ठूँठ गायब!
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 5 अक्टूबर 2024 को डीएफओ मयंक गुर्जर ने छिपीखापा बीट का निरीक्षण अपनी डायरी में दर्ज किया। डायरी में उन्हें तेंदुआ और बाघ के पदचिन्ह तो दिखे, लेकिन कटे हुए पेड़ों के ठूँठ नहीं!
सुरक्षा कर्मी जंगल नहीं, बंगले की चाकरी में
शिकायत में यह भी आरोप है कि डीएफओ के सरकारी आवास की सुरक्षा में 12 कर्मचारी तैनात रहते हैं। इनका वेतन वन समिति से “वन सुरक्षा” के नाम पर लगभग 1.5 लाख रुपये मासिक दिया जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बावजूद, वन रक्षकों को कार्यालय और निजी कार्यों में लगाया जा रहा है।

लकड़ी पुलिस कब्जे में क्यों?
356 और पहले कटे 239 वृक्षों की सागौन लकड़ी पुलिस थाने में पाई गई। 14 अप्रैल 2024 को उड़नदस्ता ने रेंजर को सूचना दी कि लकड़ी गुर्रा थाने में रखी गई है। जब वन विभाग टीम ज़ब्ती करने पहुंची तो थाना स्टाफ ने विरोध कर धमकाया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी यह कहते सुनाई दिए कि “साहब के कहने पर लकड़ी यहां लाई गई है।”
पीसीसीएफ संरक्षण ठाकुर सख्त
मामले की तस्वीरें और शिकायतें पीसीसीएफ (संरक्षण) ठाकुर तक पहुंची हैं। ठाकुर ने इसे गंभीर मानते हुए सीएफ और डीएफओ से जवाब-तलब किया है। उन्होंने कहा कि भोपाल से राज्य स्तरीय उड़नदस्ता भेजकर जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रमुख सवाल
- जंगल कटने के बाद भी सीएफ-डीएफओ पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- डीएफओ को तेंदुआ-बाघ के पदचिन्ह तो दिखे, कटाई के ठूँठ क्यों नहीं दिखे?
- सागौन लकड़ी वन विभाग के बजाय पुलिस कब्जे में क्यों है?
- क्या अवैध कटाई में पुलिस की संलिप्तता है?
