श्रीवास्तव और चतुर्वेदी 31 जुलाई को होंगे रिटायर, सुदीप सिंह को पुनर्वास की तैयारी
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग में शीर्ष स्तर पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। मौजूदा वन बल प्रमुख (PCCF) असीम श्रीवास्तव का कार्यकाल 31 जुलाई 2025 को समाप्त हो रहा है। उनके स्थान पर वन विकास निगम के प्रबंध संचालक वीएन अंबाड़े को अगला वन बल प्रमुख बनाए जाने की तैयारी है। 1988 बैच के आईएफएस अधिकारी अंबाड़े का कार्यकाल करीब 7 महीने का होगा।
श्रीवास्तव का कार्यकाल: सीमित प्रभाव, विवादों में भी रहे
वन बल प्रमुख के रूप में 17 महीने के कार्यकाल में असीम श्रीवास्तव प्रशासनिक सुधारों को लेकर कोई ठोस छाप नहीं छोड़ सके। प्रभारी परंपरा को जारी रखने और परिवार सहित 5 सितारा होटलों में कार्यशालाओं के आयोजन को लेकर वे खासे विवादों में भी रहे। सूत्रों के अनुसार, मुख्यालय से लेकर फील्ड तक का प्रशासनिक ढांचा चरमराता रहा और वरिष्ठ अफसरों के साथ भी सामंजस्य की कमी रही।
वीएन अंबाड़े: वित्तीय अनुशासन का अनुभव

1988 बैच के आईएफएस वीएन अंबाड़े ने वन विकास निगम के प्रबंध संचालक के रूप में वित्तीय संकट से जूझ रहे निगम को संतुलित किया और विभाग में अपनी संगठनात्मक दक्षता का परिचय दिया। यही कारण है कि अंबाड़े को वन बल प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपना तय माना जा रहा है।
पीसीसीएफ विकास की कुर्सी के लिए होड़
31 जुलाई को ही पीसीसीएफ विकास के पद पर कार्यरत कमलेश चतुर्वेदी भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस पद के लिए 1992 और 1993 बैच के वरिष्ठ अधिकारियों में कड़ी होड़ मची है। चर्चा में प्रमुख नाम—
- पुरुषोत्तम धीमान (पीसीसीएफ सामाजिक वानिकी)
- प्रदीप वासुदेव
- डॉ. समिता राजोरा (पीसीसीएफ मानव संसाधन, लंबे समय से मुख्यधारा से दूर)
निगम में कौन संभालेगा जिम्मा?
अंबाड़े के वन बल प्रमुख बनते ही प्रबंध संचालक वन विकास निगम का पद रिक्त हो जाएगा। इसके लिए चर्चा में हैं—
- पुरुषोत्तम धीमान
- डॉ. समिता राजोरा
- मनोज अग्रवाल (पीसीसीएफ कार्य आयोजना प्रमुख)
सुदीप सिंह के पुनर्वास की तैयारी
पीसीसीएफ विकास पद से पूर्व में सेवानिवृत्त सुदीप सिंह को असीम श्रीवास्तव द्वारा पुनर्वासित करने की कोशिशें भी चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, श्रीवास्तव ने सेवानिवृत्ति से पहले मंत्रालय को तीन प्रस्ताव भेजे हैं—
- जैव विविधता बोर्ड में वित्तीय सलाहकार बनाने का प्रस्ताव (जबकि वहां ऐसा कोई पद नहीं है)।
- लघु वनोपज संघ में सलाहकार पद।
- इको पर्यटन बोर्ड में सलाहकार पद।
इन प्रस्तावों पर विभाग के भीतर आलोचना हो रही है कि यह अनावश्यक वित्तीय बोझ डालने और पूर्व सहयोगी को संरक्षण देने की पहल है।
वन विभाग में आने वाले दिनों में नेतृत्व स्तर पर अहम बदलाव और नियुक्तियां देखने को मिलेंगी। जहां अंबाड़े के नेतृत्व से वित्तीय अनुशासन और व्यावहारिक प्रशासन की उम्मीदें जुड़ी हैं, वहीं आगामी विकास प्रमुख और निगम प्रमुख की कुर्सी के लिए गुटबाजी और लॉबिंग भी तेज हो गई है।
