2025 में 23 वन अधिकारी होंगे रिटायर

गणेश पाण्डेय, भोपाल। नर्मदापुरम वनमंडल के इटारसी परिक्षेत्र के छिपीखापा जंगल में ताखु प्रजाति के दुर्लभ सागौन पेड़ों की अवैध कटाई से हुए करीब दो करोड़ से अधिक के राजस्व नुकसान के मामले में विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्य वनसंरक्षक (सीसीएफ) अशोक कुमार ने इस प्रकरण में 16 छोटे कर्मचारियों और अधिकारियों पर आरोप पत्र जारी कर अनुशासनात्मक कार्यवाही आरंभ कर दी है। हालांकि, उन्होंने डीएफओ मयंक गुर्जर को क्लीन चिट देते हुए कार्रवाई से बाहर रखा है, जिस पर विभाग में सवाल उठने लगे हैं।

अवैध कटाई से दो करोड़ का नुकसान, DFO पर नहीं गिरी गाज

सूत्रों के अनुसार, छिपीखापा क्षेत्र में पिछले दो वर्षों (2023-2024) के दौरान 1236 सागौन पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी, जिससे विभाग को करीब ₹2.04 करोड़ का नुकसान हुआ। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि संबंधित अधिकारी और बीट अमला गश्त व गणना में पूरी तरह लापरवाह रहा, जिससे लकड़ी तस्कर लगातार सक्रिय बने रहे।

सीसीएफ अशोक कुमार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनके खिलाफ विभागीय दंड की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। सभी को 15 दिनों में जवाब देने का नोटिस जारी किया गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर निलंबन और वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की जाएगी।

हॉफ और पीसीसीएफ ने मांगी DFO की जवाबदेही

वहीं, हॉफ एवं पीसीसीएफ वी.एन. अंबाड़े ने सीसीएफ कुमार को निर्देश दिया है कि इतनी बड़ी आर्थिक हानि के मामले में डीएफओ मयंक गुर्जर की जवाबदेही तय किए बिना जांच को अधूरी नहीं माना जा सकता। हॉफ ने इस संबंध में सीसीएफ को अल्टीमेटम जारी करते हुए रिपोर्ट संशोधित करने के निर्देश दिए हैं।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुई कटाई केवल फील्ड स्तर की लापरवाही से संभव नहीं थी। निरीक्षण, नियंत्रण और निगरानी में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

इन 16 अफसर-कर्मचारियों पर गिरी गाज

सीसीएफ अशोक कुमार ने डीएफओ को कार्रवाई से बचाते हुए एसडीओ और बीट अमले पर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की है। जिन पर आरोप पत्र जारी किए गए हैं, उनमें शामिल हैं —
एसडीओ मान सिंह मरावी, एसडीओ नर्मदापुरम महेंद्र कुमार गौर, पूर्व एसडीओ जगदीश प्रसाद बौरासी, प्रभारी डिप्टी रेंजर, वनक्षेत्रपाल हरिओम मनु, श्रेयांस कुमार जैन, तत्कालीन वनपाल शिवकुमार तिवारी, अजय कुमार श्रीवास्तव, राजेंद्र कुमार नागवंशी, वनरक्षक राजेश यादव, राजेश सरयाम, अजय कुमार गौर, रामकुमार पटेल, संतोष योगी, राजकुमारी, नारायण सिंह वर्मा और राकेश वर्मा

क्या है पूरा मामला

सितंबर 2025 में इटारसी परिक्षेत्र के छिपीखापा वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ताखु सागौन की अवैध कटाई की शिकायतें सामने आई थीं। सर्वे में पाया गया कि करीब 700 हेक्टेयर क्षेत्र में 1236 सागौन के पेड़ पूरी तरह से गायब हैं। यह कटाई 2023 से 2024 के बीच की गई थी, उस समय क्षेत्रीय वन अमला तैनात था।

वन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में माना गया कि यह घटना संवेदनशील निगरानी प्रणाली की विफलता का नतीजा है, जिससे न केवल विभाग को राजस्व का नुकसान हुआ बल्कि दुर्लभ प्रजाति के पेड़ों की अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक क्षति भी हुई है।

छिपीखापा कटाई कांड ने वन विभाग की प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां फील्ड अमले पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर विभागीय चुप्पी कई चर्चाओं को जन्म दे रही है। अब देखना यह होगा कि हॉफ और पीसीसीएफ के निर्देशों के बाद क्या डीएफओ की भूमिका पर भी विभागीय शिकंजा कसता है या नहीं।