ट्रेन से कटकर टाइगर की मौत और कटंगी में बाघ का शव मिलने से झकझोरे गए HOF, फील्ड अफसरों की लापरवाही पर नाराजगी
भोपाल। मध्य प्रदेश में बाघों और तेंदुओं की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग के शीर्ष नेतृत्व को गंभीर चिंता में डाल दिया है। मिडघाट पट ट्रैक पर ट्रेन से कटकर टाइगर की मौत और दक्षिण बालाघाट वन मंडल के कटंगी क्षेत्र में बाघ का शव मिलने की घटनाओं ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े को झकझोर कर रख दिया है।
इन घटनाओं से अत्यंत दुखी अंबाड़े ने लापरवाह अधिकारियों को कड़े शब्दों में पत्र लिखते हुए साफ कहा है कि अब सिर्फ पत्राचार नहीं, बल्कि ठोस और कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर प्रकरण की गंभीरता से विवेचना की जाए।
तीन महीनों में तीसरा पत्र, फिर भी नहीं सुधरा फील्ड अमला
चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले तीन महीनों में यह तीसरा पत्र है, इसके बावजूद मैदानी अफसरों और कर्मचारियों के रवैये में कोई सुधार नहीं आया।
वन बल प्रमुख ने खुद माना है कि—
- रिजर्व और सामान्य वन क्षेत्रों में बाघों की मौतें हो रही हैं
- लेकिन फील्ड स्टॉफ को समय रहते जानकारी तक नहीं मिल रही,
- जो कि सबसे बड़ी प्रशासनिक चूक है।
12 दिसंबर को जारी ताजा पत्र में अंबाड़े ने स्पष्ट लिखा कि बाघ और तेंदुआ संरक्षण विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसके बावजूद मौतों की घटनाएं बढ़ रही हैं। इनमें—
- विद्युत करंट,
- सड़क दुर्घटना,
- रेल दुर्घटना
- और अन्य कारण शामिल हैं।
उन्होंने चेताया कि इस लापरवाही को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘अफसर फील्ड में नहीं, व्हाट्सएप ग्रुप में व्यस्त’
वन बल प्रमुख का मानना है कि कई अधिकारी और उनका स्टॉफ मैदानी निगरानी के बजाय व्हाट्सएप ग्रुप में अधिक समय बिता रहे हैं।
हालांकि कुछ डीएफओ का यह भी कहना है कि—
मुख्यालय में बैठे कुछ पीसीसीएफ लगातार वीसी और अलग–अलग फॉर्मैट में जानकारियां मांगते हैं,
जिससे वन मंडलाधिकारियों को पूरा दिन कार्यालय में ही बैठना पड़ता है।

वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश
कटंगी और मेलघाट–रातापानी की घटनाओं के बाद अंबाड़े ने निर्देश दिए हैं कि—
- वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए,
- रेलवे और अन्य एजेंसियों से समन्वय बनाकर दुर्घटनाओं को रोका जाए,
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि टाइगर रिजर्व में पुख्ता व्यवस्था के बावजूद शिकार, हड्डियों की जब्ती और मौतों की घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं, जो कर्मचारियों की लापरवाही दर्शाती हैं।
8 महीनों में 48 से अधिक टाइगर की मौत, 9 बाघिनें भी शामिल
प्रदेश में हाल के महीनों में रातापानी, सतपुड़ा, पेंच, कान्हा और रिजर्व से बाहर कटंगी में बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं।
इस साल सिर्फ 8 महीनों में 48 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है, जिनमें—
- 5 से 8 वर्ष की उम्र की 9 बाघिनें भी शामिल हैं,
- जो भविष्य में बाघों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती थीं।
टाइगर मौत के प्रमुख कारण
- अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह सक्रिय
- स्थानीय लोगों को लालच देकर शिकार
- शाकाहारी वन्यजीवों की कमी से बाघों में आपसी संघर्ष
- शिकार और लापरवाही पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई का अभाव
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघ के अवशेषों की मांग
- जंगलों में आग, कटाई, सरकारी प्रोजेक्ट्स और अतिक्रमण
वन बल प्रमुख का स्पष्ट संदेश
“अभी पत्र जारी किया है।
आगे यदि बाघ या शावकों की मौत प्राकृतिक कारणों के अलावा अन्य कारणों से होती है,
तो संबंधितों पर ठोस कार्रवाई होगी।
जहां कमी है, उसे समय रहते दूर किया जाए।”
— वीएन अंबाड़े, वन बल प्रमुख, मध्य प्रदेश

