गणेश पाण्डेय, भोपाल। नर्मदापुरम वन मंडल के इटारसी रेंज अंतर्गत छिपीखापा बीट (आरएफ-112) में अवैध सागौन कटाई का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। वर्ष 2024 से 2025 के बीच हुई इस तस्करी में अब तक लगभग एक हजार ठूंठों की गिनती की जा चुकी है और वन विभाग को करीब दो करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति का अनुमान लगाया गया है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ- संरक्षण) विभाष ठाकुर ने भोपाल से राज्य स्तरीय उड़न दस्ता भेजने का निर्णय लिया है।
ठाकुर ने उड़न दस्ता प्रभारी को सात दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल वास्तविक हानि का आकलन करना है, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करना है जिन्होंने पूरे प्रकरण में लापरवाही बरती।

अधिकारियों की उदासीनता पर सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि छिपीखापा में लंबे समय से सागौन के पेड़ कटते रहे, लेकिन नर्मदापुरम डीएफओ और उनका फील्ड स्टाफ इसे रोकने में नाकाम रहा। क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (सीएफ) अशोक कुमार अब तक एक बार भी मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान मुख्यालय को लगातार भ्रामक जानकारियां भेजी जाती रहीं, जिससे वास्तविकता सामने नहीं आ पाई।

कार्रवाई और आरोप
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक एक एसडीओ और रेंजर को आरोपपत्र थमाया गया है, जबकि चार वनकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। हालांकि, वनकर्मियों का कहना है कि इसके लिए डीएफओ की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। वहीं शिकायतकर्ता मधुकर चतुर्वेदी की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारी से कराई जाए, क्योंकि उड़न दस्ता प्रभारी पर भी लीपापोती करने का आरोप लगाया जाता रहा है।

सुरक्षा तंत्र की कमजोरी
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि परिक्षेत्र सहायक पांडरी के हरदा स्थानांतरण के बाद इस उपपरिक्षेत्र में पर्याप्त स्टाफ और चौकीदारों की व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते सुरक्षा तंत्र पूरी तरह कमजोर पड़ गया और तस्करों ने मौके का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर अवैध कटाई को अंजाम दिया।
इस पूरे प्रकरण ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर भोपाल से भेजे जा रहे राज्य स्तरीय उड़न दस्ते की रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि जिम्मेदारी आखिरकार किसकी है और दोषियों पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
