Vallabh Bhawan 75 2 1.jpg

जांच समिति ने फर्जी बताया, लेकिन मंत्री ने विधानसभा में सही ठहराया

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश का आयुष विभाग एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला विभाग की प्रभारी उप संचालक डॉ. निधि गुप्ता के अनुभव प्रमाण पत्र से जुड़ा है। आरोप है कि सेवा में आने के लिए उन्होंने जिस संस्था का अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, उस संस्था ने ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी करने से ही इंकार कर दिया। इसके बावजूद डॉ. गुप्ता फिलहाल अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग की तीन सदस्यीय जांच समिति ने उनके अनुभव प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया था, लेकिन बीते विधानसभा सत्र में आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने इसे नियमों के अनुरूप बताया।

कैसे उठा विवाद

2015 में एमपी पीएससी के जरिए चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती हुई थी। नियमों के मुताबिक, चयनित उम्मीदवार के पास कम से कम पाँच साल का कार्य-अनुभव होना जरूरी था। दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान पाया गया कि डॉ. निधि गुप्ता ने सिर्फ 4 साल 9 दिन का अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया।

यह प्रमाण पत्र मंदसौर की जिस संस्था से बताया गया था, उसने साफ इंकार किया कि उन्होंने ऐसा कोई प्रमाण पत्र कभी जारी ही नहीं किया। इतना ही नहीं, संस्था ने यह भी स्पष्ट लिखा कि डॉ. गुप्ता ने उनके यहां कभी कार्य ही नहीं किया।

जांच समिति की रिपोर्ट

तत्कालीन प्रभारी संयुक्त संचालक डॉ. सी.पी. शर्मा, उप संचालक डॉ. पी.सी. शर्मा और सहायक संचालक डॉ. वंदना बौराना की समिति ने अपनी रिपोर्ट में डॉ. गुप्ता के अनुभव प्रमाण पत्र को अमान्य ठहराया। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि यह दस्तावेज़ भर्ती नियमों और विज्ञापन की शर्तों के विरुद्ध है।

विधानसभा में सवाल और मंत्री का जवाब

4 अगस्त को विधानसभा सत्र में विधायक केशव देसाई ने जब यह मुद्दा उठाया, तब आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने लिखित जवाब में कहा कि “डॉ. गुप्ता का अनुभव प्रमाण पत्र भर्ती नियमों के अनुरूप है।”
यह जवाब विभागीय जांच रिपोर्ट से बिल्कुल उलट था, जिसने पहले ही दस्तावेज को फर्जी करार दिया था।

चार और अधिकारी भी घेरे में

जांच रिपोर्ट ने सिर्फ डॉ. निधि गुप्ता ही नहीं, बल्कि अन्य अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। इनमें –

  • डॉ. मनीषा पाठक, जिला आयुष अधिकारी, उज्जैन
  • डॉ. सुरत्ना चौहान, जिला आयुष अधिकारी, जबलपुर
  • डॉ. नरेंद्र कुमार पटेल, जिला आयुष अधिकारी, सतना
  • डॉ. गिरिराज बाथम, जिला आयुष अधिकारी, शाजापुर

रिपोर्ट में कहा गया कि इन अधिकारियों के अनुभव पत्र भी भर्ती नियमों के अनुरूप नहीं थे। किसी का अनुभव संविदा का था, तो किसी का अधूरा।

फर्जी को वैध ठहराने का खेल?

जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद चयनित अधिकारियों को बचाने की कवायद शुरू हुई। मंत्रालय स्तर पर दूसरी समिति गठित की गई, जिसने उल्टा निष्कर्ष दिया और कहा कि “प्रमाण पत्र भर्ती नियमों के अनुरूप है।” यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या फर्जी प्रमाण पत्र भी भर्ती नियमों में स्वीकार्य हो सकते हैं?