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नई नियमावली से खुला भर्ती का रास्ता, हजारों छात्रों के सामने भविष्य की चुनौती

चंद्रकेतु मिश्रा,  प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में अशासकीय विद्यालयों के लिए टीजीटी (सहायक अध्यापक) और पीजीटी (प्रवक्ता) भर्ती का रास्ता अब साफ हो गया है। शासन ने पुरानी नियमावली निरस्त कर नई शैक्षिक अर्हता लागू करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय जल्द ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को रिक्त पदों का अधियाचन भेजेगा, जिससे लंबे समय से रुकी भर्ती प्रक्रिया को गति मिल सकेगी।

नई शैक्षिक अर्हता लागू

22 अप्रैल 2025 को जारी पुरानी नियमावली को रद्द करते हुए, 9 सितंबर से नई अर्हता प्रभावी कर दी गई है।

  • टीजीटी जीव विज्ञान भर्ती के लिए अब अभ्यर्थियों के पास जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान में स्नातक डिग्री और बीएड होना अनिवार्य होगा।
  • प्रवक्ता भर्ती (पीजीटी) में भूगोल और नागरिक शास्त्र विषय की शैक्षिक अर्हता में संशोधन किया गया है।
  • नए आदेश के तहत, प्रवक्ता भर्ती के लिए बीएड डिग्री अनिवार्य कर दी गई है।

अभ्यर्थियों में नाराजगी, कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

बीएड की अनिवार्यता को लेकर अभ्यर्थियों में आक्रोश है। प्रवक्ता भर्ती में बीएड की अनिवार्यता के खिलाफ लालता प्रसाद समेत 33 अभ्यर्थियों ने न्यायालय में याचिका दाखिल की है।

  • अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले केवल स्नातकोत्तर डिग्री के आधार पर भर्ती होती थी।
  • अब अचानक नियम बदलकर बीएड अनिवार्य कर देना अन्यायपूर्ण है।
  • लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हो गए हैं, जिन्होंने वर्षों तक केवल स्नातकोत्तर के आधार पर तैयारी की थी।
  • याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि भर्ती में कूलिंग पीरियड (संक्रमणकाल) दिया जाए, ताकि पहले से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

भर्ती प्रक्रिया पर असर

नई शैक्षिक अर्हता लागू होने के बाद अब भर्ती प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, कोर्ट में मामला लंबित होने से प्रक्रिया पर अस्थायी असर पड़ सकता है। शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बीएड को अनिवार्य बनाने का निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अभ्यर्थियों को तैयारी का उचित समय दिया जाना चाहिए।