मुख्यमंत्री मोहन यादव की स्वीकृति, केंद्रीय वन मंत्रालय से आर्थिक सहयोग का आश्वासन, बैतूल जिले के 250 वर्ग किमी क्षेत्र को संरक्षित दर्जा
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश को अब उसका पहला ‘फॉरेस्ट कंजरवेशन रिजर्व’ मिलने जा रहा है। यह ऐतिहासिक पहल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल के नेतृत्व में साकार हुई है, जिन्हें हाल ही में पार्टी की कमान सौंपी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैतूल जिले के ताप्ती वन क्षेत्र को इस नए संरक्षित दर्जे की मंजूरी दे दी है। अब जल्द ही इसका विधिवत नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
राज्य में पहली बार घोषित होगा ‘कंजरवेशन रिजर्व’
बैतूल जिले के दक्षिण, पश्चिम और तावड़ी वनमंडलों के 250 वर्ग किमी क्षेत्र को शामिल करते हुए ताप्ती कंजरवेशन रिजर्व गठित किया जा रहा है। यह वन क्षेत्र कुल 129 बीटों में विभाजित है, जिसमें 224.844 वर्ग किमी आरक्षित एवं 25.156 वर्ग किमी संरक्षित वन शामिल हैं। खास बात यह है कि इस पूरे क्षेत्र में न कोई राजस्व ग्राम आता है, न ही कोई वनाधिकार अधिनियम के तहत निजी कब्जा या पट्टा है। इससे यह रिजर्व पूर्ण रूप से संरक्षित वन्य जीव आवास के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
केंद्रीय मंत्री से हुई थी चर्चा, मिला था समर्थन
ताप्ती कंजरवेशन रिजर्व के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके की पहल भी अहम रही। उइके ने हाल ही में केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव से दिल्ली में मुलाकात कर ताप्ती क्षेत्र को संरक्षित दर्जा देने का आग्रह किया था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का भरोसा भी दिलाया था।

तीन प्रस्तावों में ताप्ती को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास प्रदेश के तीन अलग-अलग स्थानों से फॉरेस्ट कंजरवेशन रिजर्व घोषित करने के प्रस्ताव आए थे। इनमें राघौगढ़ (पूर्व कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह), बालाघाट जिले का सोनेवानी और बैतूल का ताप्ती प्रस्ताव शामिल था। किंतु भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खण्डेलवाल की सक्रिय भूमिका से ताप्ती प्रस्ताव को प्राथमिकता दी गई और उसे शीघ्र मंजूरी दी गई।
वन्यप्राणियों का अनमोल निवास
ताप्ती कंजरवेशन रिजर्व क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, भालू, भेड़की, चीतल, कोटरी, नीलगाय, जंगली सूअर, लकड़बग्घा, और लंगूर जैसे प्रमुख वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास है। यह रिजर्व न केवल जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आने वाले समय में मध्यप्रदेश के इको-पर्यटन मानचित्र पर भी एक विशेष स्थान बनाएगा।
स्थानीय सहमति और सामाजिक सहभागिता
रिजर्व क्षेत्र के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में कुल 39 ग्राम स्थित हैं, जिनकी दैनिक लकड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति राज्य वन डिपो के माध्यम से की जाती है। इनमें से 37 ग्रामों ने ताप्ती रिजर्व के गठन को लेकर लिखित सहमति दी है, जो स्थानीय सहभागिता का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
भविष्य की दिशा: संरक्षण, पर्यटन और आजीविका
ताप्ती कंजरवेशन रिजर्व से न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि इससे क्षेत्रीय पर्यटन और वनवासियों की आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इसके लिए प्रबंधन योजना तैयार करेंगी, जिसमें बायोडायवर्सिटी संरक्षण, ईको-सेंसिटिव जोन विकास, जल स्रोतों की सुरक्षा और समुदाय आधारित सतत पर्यटन की अवधारणा प्रमुख होगी।
