मऊगंज में करंट से हाथी की मौतअमल्लखपुर के पास करंट की चपेट में आने के बाद मृत हाथी और मौके पर मौजूद वन विभाग की टीम।

मऊगंज-सीधी सीमा में हाथी की मौत से वन विभाग की निगरानी-गश्ती व्यवस्था पर सवाल

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मऊगंज-सीधी सीमा के अमल्लखपुर के पास शनिवार को करंट की चपेट में आने से एक हाथी की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चुरहट रेंज के कमर्जी इलाके में घूम रहे दो हाथियों के दल में शामिल हाथी रात में गांव की ओर पहुंचा था। इसी दौरान घर की विद्युत सप्लाई के तार की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। घटना की पुष्टि स्थानीय रिपोर्ट में भी की गई है।

पहले से इलाके में घूम रहे थे दो हाथी

यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्र में दो हाथियों की मौजूदगी पिछले करीब 15 दिनों से बनी हुई थी। हाथियों का यह दल मऊगंज के रास्ते सीधी की ओर बढ़ा था। 13 सितंबर को मऊगंज क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही की रिपोर्ट सामने आई थी। उनकी निगरानी के साथ आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा के लिए कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति बंद किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

15 सितंबर को दोनों हाथियों के सीधी जिले की सीमा में पहुंचने और ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को इसकी सूचना दिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

मऊगंज में करंट से हाथी की मौत
मृत हाथी के पास दिखाई दे रही विद्युत लाइन और घटनास्थल का दृश्य।

बिजली बंद कराने के बावजूद कैसे हुआ हादसा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हाथियों की लोकेशन और उनके आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ने की जानकारी वन विभाग को थी और सुरक्षा के लिए बिजली बंद कराने तक के इंतजाम किए जा रहे थे, तो अमल्लखपुर में हाथी विद्युत तार की चपेट में कैसे आ गया?

स्थानीय जानकारी के अनुसार हाथी रात में गांव में पहुंचा और अमरूद के पेड़ को नुकसान पहुंचाया। पेड़ गिरने से विद्युत तार टूटकर हाथी के संपर्क में आने की बात सामने आई है। हालांकि तार टूटने और हाथी की मौत के बीच पूरा घटनाक्रम जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

गश्ती दल की निगरानी पर सवाल

घटना ने वन विभाग की गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जब दो हाथियों की गतिविधियां लगातार ट्रैक की जा रही थीं, तो आबादी वाले क्षेत्र में उनके प्रवेश की सूचना गश्ती दल को समय पर क्यों नहीं मिली? क्या हाथियों के संभावित मार्ग में आने वाली विद्युत लाइनों की पहले से पहचान की गई थी? क्या वन विभाग और बिजली विभाग के बीच तत्काल बिजली बंद कराने की प्रभावी व्यवस्था जमीन पर लागू थी?

ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हाथियों के आबादी क्षेत्र में आने की जानकारी पहले से थी और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे थे।

मौत का अंतिम कारण जांच के बाद होगा स्पष्ट

वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम और घटनास्थल से जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि होगी। फिलहाल करंट को मौत का प्रारंभिक कारण माना जा रहा है।

घटना के बाद अब केवल हाथी की मौत की जांच ही नहीं, बल्कि हाथियों की निगरानी, गश्ती दल की सक्रियता और आबादी वाले क्षेत्रों में विद्युत लाइनों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा जरूरी हो गई है। खासकर तब, जब इसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी वन विभाग को पहले से थी।