गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड में सदस्य सचिव पद पर सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुदीप सिंह की संविदा नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में विवाद गहरा गया है। राज्य शासन ने 24 फरवरी 2026 को हुई मंत्रिमंडल बैठक के निर्णय के अनुपालन में सोमवार को नियुक्ति आदेश जारी किए। आदेश के अनुसार सुदीप सिंह को मप्र सिविल पदों पर संविदा नियुक्ति नियम, 2017 के नियम 4(2) के तहत एक वर्ष अथवा आगामी आदेश तक के लिए सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सदस्य सचिव का यह पद अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए डेपुटेशन की पोस्ट है और इस पर संविदा नियुक्ति का प्रावधान नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी सुदीप सिंह जुलाई 2025 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति से पूर्व ही उन्होंने तत्कालीन वन बल प्रमुख के माध्यम से इस पद पर संविदा नियुक्ति का प्रस्ताव मंत्रालय में भिजवाया था।
फाइल मूवमेंट और आपत्तियां
विभागीय सूत्रों के अनुसार, संविदा नियुक्ति के प्रस्ताव पर सामान्य प्रशासन विभाग ने पहले आपत्ति दर्ज की थी। अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए सदस्य सचिव पद पर संविदा नियुक्ति को अनुचित बताया था। इसके बाद फाइल का मूवमेंट रुक गया था। बताया जाता है कि मंत्रालय स्तर पर भी इस पर एतराज हुआ था।
हालांकि, बाद में मामला मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया और निर्णय के बाद नियुक्ति आदेश जारी किए गए। सूत्रों का दावा है कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाया गया। यह भी कहा जा रहा है कि सरकार के समक्ष पद रिक्तियों और अधिकारियों की कमी को लेकर ऐसे तथ्य प्रस्तुत किए गए, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं।
वर्तमान पदस्थापना पर भी चर्चा
जानकारी के अनुसार, सदस्य सचिव के पद पर पहले से एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारी पदस्थ हैं। ऐसे में संविदा नियुक्ति की आवश्यकता और औचित्य पर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। वन विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि यदि एपीसीसीएफ स्तर के पद रिक्त हैं, तो नियमित पदस्थापना की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
राजनीतिक सिफारिश के आरोप
सूत्रों के अनुसार, इस नियुक्ति के पीछे उत्तर प्रदेश के एक प्रभावशाली नेता की सिफारिश की चर्चा है। हालांकि शासन की ओर से इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। विपक्षी दलों ने इसे नियमों की अनदेखी बताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
राज्य जैव विविधता बोर्ड जैव विविधता संरक्षण, जैव संसाधनों के प्रबंधन और पारिस्थितिकी संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण निकाय है। ऐसे में सदस्य सचिव जैसे प्रमुख पद पर नियुक्ति को लेकर उठे सवाल प्रशासनिक प्रक्रिया और शासन की पारदर्शिता पर बहस को जन्म दे रहे हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
