गणेश पाण्डेय, आईबीएन, भोपाल। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में स्थित मढई के एक रिसॉर्ट में वन्यजीवों के अवयव मिलने का मामला सामने आया है। वन विभाग की टीम ने बागड़ा बफर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत मढई स्थित रिसॉर्ट फोरसिथ की जांच के दौरान चीतल के सींग, सेही के कांटे और सर्प की कांचली को बिना किसी वैध अनुमति के डिस्प्ले में रखा हुआ पाया। विभाग के अनुसार यह कृत्य वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
जांच के दौरान वन्यप्राणी चीतल के चार एन्टलर (सींग), सेही के चार कांटे और सर्प की दो कांचलियां बरामद की गईं। बफर रेंज बागड़ा के वन रक्षक नरेंद्र परते ने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद सोहागपुर के एसडीओ आशीष खोब्रागड़े के निर्देशन में उक्त वन्यजीव अवयवों को जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
रिसॉर्ट प्रबंधन के खिलाफ प्रकरण दर्ज
वन विभाग ने मामले में रिसॉर्ट के होटल मैनेजर नितुन महतो और नेचुरलॉजिस्ट फैजान अंसारी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण तैयार किया है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों से जुड़े किसी भी अवयव को बिना वैध अनुमति के रखना वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन है। जब्त किए गए अवयवों के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुरानी ट्रॉफी बताने की चर्चा भी तेज
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आ रही है कि जब्त किए गए अवयवों को “पुरानी ट्रॉफी” बताकर मामले को हल्का करने की कोशिश की जा सकती है। सूत्रों का दावा है कि इससे पहले भी ऐसे मामलों में जांच को लंबा खींचने या फाइलों को दबाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध
विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीवों के अंग, अवशेष या उनसे जुड़े किसी भी अवयव को बिना अनुमति रखना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है। विभाग का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
