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गणेश पाण्डेय, भोपाल। indianbreakingnews.com पर प्रकाशित समाचार नर्मदापुरम में डेढ़ करोड़ के जंगल साफ़: सागौन कटाई कांड से हिला वन विभाग का बड़ा असर हुआ है। इटारसी रेंज के पांडरी वन क्षेत्र (RF 112) में 356 सागौन वृक्षों की अवैध कटाई की रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग की उच्च स्तरीय कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) विभाष ठाकुर ने तत्काल प्रभाव से नर्मदापुरम वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक अशोक कुमार से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है। पीसीसीएफ ने 27 से 30 नवंबर 2024 के बीच दर्ज प्रकरणों का ब्यौरा, उनकी छायाप्रति और आंकी गई क्षति का विवरण मांगा है।

पहले क्या था मामला

इटारसी रेंज के अंतर्गत आने वाले नर्मदापुरम वन वृत्त में बीते दिनों दर्जनों सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब स्थानीय ग्रामीणों ने पेड़ों की गिनती में भारी कमी की शिकायत की। सूत्रों ने बताया कि इस अवैध कटाई में वनकर्मियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई थी।

indianbreakingnews.com ने इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित कर विभागीय तंत्र की लापरवाही और माफियाओं की मिलीभगत को उजागर किया था।

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जांच को लेकर उठा सवाल, राखी नंदा का नाम आगे

सेवानिवृत्त एसडीओ मधुकर चतुर्वेदी ने इस मामले की जांच सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा से कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नर्मदापुरम वृत के उड़नदस्ता दल की रिपोर्ट को कमजोर करने के लिए एक POR को चार हिस्सों में बांटा गया, जिससे मामले की गंभीरता कम दिखाई दे।

DFO पर भी लगे आरोप, पदस्थापना बदलने की मांग

शिकायतकर्ता ने DFO नर्मदापुरम (सामान्य) मयंक गुर्जर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पूर्व में भी एक POR में हेरफेर कराई थी। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब अधिकारी को तत्काल अन्यत्र पदस्थापित किया जाए।

विभाग में हड़कंप, जांच के आदेश

खबर के प्रकाशन के बाद पीसीसीएफ (प्रोडक्शन) विभाष ठाकुर ने तत्काल जांच के आदेश दिए। राखी नंदा के नेतृत्व में टीम को मौके पर भेजा गया। उड़नदस्ता दल ने भी सघन निरीक्षण कर कटे हुए पेड़ों के ठूंठों को चिन्हित किया और रिपोर्ट में वनमाफिया की संलिप्तता की पुष्टि की।

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में सागौन के पेड़ बिना स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के नहीं काटे जा सकते। इस आधार पर कई जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू

वन विभाग अब संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, रेंजर मयंक गुर्जर की कार्यप्रणाली पर विशेष सवाल उठे हैं। विभागीय सूत्रों ने माना कि इस मामले में लापरवाही ही नहीं बल्कि प्रत्यक्ष मिलीभगत भी हो सकती है। पीसीसीएफ ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और वन माफिया पर शिकंजा कसने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

indianbreakingnews.com के प्रकाशन के बाद ही यह मामला राज्य स्तर पर संज्ञान में आया और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह समाचार सामने नहीं आता तो संभवतः यह कटाई दबाकर रख दी जाती और वन माफिया बेखौफ सक्रिय रहते। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस कार्रवाई से वन विभाग में जवाबदेही तय होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।