हरित अर्थव्यवस्था और लैंगिक समावेश की दिशा में नया ऐतिहासिक कदम
गणेश पाण्डेय, भोपाल। भारतीय सिविल सेवाओं के इतिहास में पहली बार, भारतीय वन सेवा (IFS) संघ ने अपने राष्ट्रीय संगठन के शीर्ष पदों पर केवल महिलाओं को नियुक्त कर ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सोमवार को आयोजित आम सभा में सर्वसम्मति से चुनी गई यह सर्व-महिला कार्यकारिणी सिविल सेवा प्रणाली में लैंगिक समानता और नेतृत्व में महिला भागीदारी की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
✦ नवनिर्वाचित महिला पदाधिकारी
नवगठित कार्यकारिणी में देशभर की चयनित महिला आईएफएस अधिकारियों को शामिल किया गया है—
- ज्योत्सना स्टालिंग – संरक्षक
- अनीता करण – अध्यक्ष
- मोनालिसा दाश – महासचिव
- डॉ. सुरभि राय – संयुक्त सचिव
- सुवेना ठाकुर – कोषाध्यक्ष
- चेष्टा सिंह – साहित्य सचिव
यह कार्यकारिणी तीन अखिल भारतीय सेवाओं में से एक, भारतीय वन सेवा के भीतर नेतृत्व की नयी परिभाषा गढ़ रही है।
🌱 हरित विकास की अग्रदूत महिलाएं
भारतीय वन सेवा का मूल उद्देश्य देश के वन, वन्यजीव एवं पर्यावरण का संरक्षण और प्रबंधन है। यह सेवा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, जैव विविधता की रक्षा और सतत विकास में अहम भूमिका निभा रही है। अब जब इस सेवा का राष्ट्रीय नेतृत्व महिलाओं के हाथ में आया है, तो यह हरित अर्थव्यवस्था को जनसंवेदनशील और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
कार्यकारिणी में शामिल महिलाएं न केवल प्रशासनिक अनुभव रखती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जनजातीय सहयोग और जैव-विविधता प्रबंधन के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे चुकी हैं।
🌍 लैंगिक समावेश और नेतृत्व का आदर्श मॉडल
देश की 36 संगठित सिविल सेवाओं में से यह पहला मौका है जब किसी संघ की सम्पूर्ण राष्ट्रीय कार्यकारिणी महिला अधिकारियों से बनी है। यह परिवर्तन दर्शाता है कि सिविल सेवाओं में अब लैंगिक संतुलन और सहभागिता केवल नीतिगत बात नहीं, बल्कि व्यवहारिक सच्चाई बनती जा रही है।
इस पहल से भविष्य में अन्य सिविल सेवा संघों को भी नेतृत्व में लैंगिक विविधता को अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है। साथ ही यह घटनाक्रम सरकारी प्रशासनिक ढांचे में समान अधिकार और अवसर की अवधारणा को मजबूती देता है।
आईएफएस संघ द्वारा गठित यह सर्व-महिला कार्यकारिणी न केवल सेवा के भीतर नेतृत्व के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत है, बल्कि यह भारत की सिविल सेवाओं में महिला भागीदारी को नई ऊंचाई देने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह कदम हरित विकास और प्रशासनिक समावेशिता के क्षेत्र में भारत के संकल्प को और मजबूत करता है।
