गणेश पाण्डेय, भोपाल। पन्ना टाइगर रिज़र्व में जंगल सफारी के दौरान जिप्सी को पाँच बाघों द्वारा रोक लिए जाने और पर्यटकों द्वारा जान जोखिम में डालकर सेल्फी लेने की घटना पर आखिरकार शासन ने संज्ञान ले लिया है। Indian Breaking News पर 29 नवम्बर को प्रकाशित खबर के बाद अब मध्यप्रदेश शासन हरकत में आ गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, मध्यप्रदेश ने आदेश जारी करते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि दो साल पुराने वायरल वीडियो के आधार पर बिना जांच किए गाइड या जिप्सी चालक को दंडित करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे विभागीय व्यवस्था और कर्मचारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
फॉरेंसिक जांच के निर्देश, जिम्मेदारों पर तय होगी जवाबदेही
शासन ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, ताकि यह तय किया जा सके कि घटना कब की है, किस परिस्थिति में हुई और इसमें किसकी लापरवाही रही। इसके साथ ही उस समय ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी।

7 दिन में रिपोर्ट तलब
आदेश में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले में की गई जांच और प्रस्तावित कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सात दिनों के भीतर शासन को प्रस्तुत की जाए।
पर्यटकों की लापरवाही भी जांच के दायरे में
वीडियो में यह साफ दिखाई देता है कि बाघों से घिरे होने के बावजूद पर्यटक गाड़ी से बाहर झुककर सेल्फी लेते नजर आए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह न केवल पर्यटकों की जान के लिए खतरा है, बल्कि इससे बाघों के स्वाभाविक व्यवहार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
खबर का असर, सिस्टम में हलचल
इस पूरे घटनाक्रम को मीडिया की सक्रियता का असर माना जा रहा है। शासन के आदेश के बाद वन विभाग में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई तय है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
