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गणेश पाण्डेय, भोपाल। बालाघाट जिले के लालबर्रा वन परिक्षेत्र में बाघिन की संदिग्ध मौत और उसके शव को जलाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस ने इस सनसनीखेज प्रकरण में वन विभाग के छह कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है, वही वनरक्षक फरार है। आरोप है कि बाघिन की मौत को छिपाने के लिए इन कर्मचारियों ने साजिशन शव को अलग-अलग जगह जलाकर सबूत मिटाने का प्रयास किया।

पुलिस द्वारा शनिवार को की गई कार्रवाई के बाद से वनरक्षक हिमांशु घोरमारे फरार है, जिसकी खोज जारी है। वहीं जिन कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई उनमें सहायक तिलक राम हिनोते के अलावा मानसिंह, हरिलाल गौंड, देव सिंह, शैलेष सिंह, शिव कुमार और अनुज शामिल हैं। इनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम समेत कई धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की पूछताछ की जा रही है।

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अफसरों पर कार्रवाई का इंतजार

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में निचले स्तर के कर्मचारियों पर तो गाज गिरी, लेकिन सवालों के घेरे में आए बड़े अफसर अब भी बचते नज़र आ रहे हैं। खासतौर पर लालबर्रा रेंज के एसडीओ फॉरेस्ट बीआर सिरसाम और डीएफओ अधर गुप्ता पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि एसडीओ सिरसाम के निलंबन का प्रस्ताव बीते एक महीने से मंत्रालय की फाइलों में लंबित है। वहीं, डीएफओ अधर गुप्ता को हटाने के आश्वासन के बावजूद उच्च स्तर से दबाव बनाकर उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष और जनप्रतिनिधियों का दबाव

इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों से लेकर स्थानीय विधायक अनुभा मुंजारे तक सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर चुकी हैं। वन्यजीव प्रेमियों का भी कहना है कि यदि जिम्मेदार अफसरों को बख्शा गया तो विभागीय भ्रष्टाचार और लापरवाही पर रोक लगाना मुश्किल होगा।

फिलहाल पुलिस की गिरफ्तारी कार्रवाई के बाद अब सबकी निगाहें मंत्रालय पर टिक गई हैं कि क्या वाकई बड़े अफसरों पर भी गाज गिरेगी, या मामला सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाएगा।