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सात महीने में प्रदेश में 35 बाघों की मौत, संरक्षण व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

गणेश पाण्डेय, भोपाल। टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को तवा नदी के बड़चापड़ा घाट के पास एक बाघ का शव मिला, जिसका पंजा गायब था और शरीर में क्लच वायर धंसा हुआ पाया गया। यह बाघ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) से संबंधित बताया जा रहा है। सतपुड़ा टाइगर की फिल्म डायरेक्टर राखी नंदा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू की गई।

गौरतलब है कि वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने 20 अगस्त को एक सख्त पत्र लिखकर बाघों और तेंदुओं की लगातार हो रही मौत पर गंभीर चिंता जताई थी, लेकिन इसके अगले ही दिन यह घटना सामने आ गई। इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पीसीसीएफ ने दी जानकारी

पीसीसीएफ (वन्य प्राणी) शुभरंजन सेन ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जिस जगह बाघ का शव मिला है, वह सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का न तो कोर एरिया है और न ही बफर जोन। फिर भी एसटीआर ने पूरा मामला अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दी है। इस क्षेत्र को लेकर नर्मदापुरम वन मंडल और वन विकास निगम के बीच विवाद की स्थिति है कि यह क्षेत्र किसके अधिकार क्षेत्र में आता है।

अम्बाड़े का पत्र और चिंता

वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने अपने पत्र में लिखा था कि पिछले 20-25 दिनों में 5-6 बाघों और तेंदुओं की मौत हुई है, जबकि इतनी मजबूत व्यवस्था होने के बाद भी कम समय में इतनी अधिक मौतें होना वन्य जीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने खास तौर पर पेंच और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का जिक्र किया, जहाँ बताया गया कि बाघ आपसी संघर्ष में मरे। अम्बाड़े ने कहा कि बाघों का संघर्ष होते समय दहाड़ दूर-दूर तक सुनाई देती है, फिर भी स्थानीय अमले को जानकारी न होना सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।

एनटीसीए के आँकड़े

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के मुताबिक, साढ़े सात महीने में प्रदेश में 34 बाघों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को तवा नदी में मिले बाघ को मिलाकर यह आंकड़ा 35 पर पहुंच गया है।
इन मौतों में से ज्यादातर राज्य के 21 टाइगर रिजर्व के भीतर हुई हैं। सिर्फ डेढ़ माह (1 जुलाई से 19 अगस्त) में 6 बाघों की मौत दर्ज की गई है।

कहाँ कितनी मौतें?

  • कान्हा टाइगर रिजर्व – 6
  • पेंच टाइगर रिजर्व – 7
  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व – 3
  • संजय डुबरी टाइगर रिजर्व – 3
  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व – 3
  • रिजर्व से बाहर – 13

(नोट: तवा नदी में शुक्रवार को मिला बाघ भी इसी आंकड़े में जोड़ा गया है।)

सवालों के घेरे में वन विभाग

लगातार हो रही मौतों और बाघ का पंजा गायब मिलने की घटना ने वन विभाग की निगरानी और संरक्षण व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई और सख्त निगरानी नहीं की गई, तो प्रदेश की “टाइगर स्टेट” की पहचान पर संकट खड़ा हो सकता है।