लास वेगास सम्मेलन में एआई के ‘गॉडफादर’ ने छेड़ी बहस, कहा– पारंपरिक नियंत्रण रणनीतियां होंगी नाकाम
आईबीएन, डिजिटल डेस्क। लास वेगास में आयोजित प्रतिष्ठित Ai4 कॉन्फ्रेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ‘गॉडफादर’ कहे जाने वाले जेफ्री हिंटन ने एआई सुरक्षा पर एक नया और चौंकाने वाला विचार प्रस्तुत कर दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बहस छेड़ दी है। हिंटन ने सुझाव दिया कि यदि एआई सिस्टम्स में ‘मातृत्व की भावना’ को समाहित कर दिया जाए, तो वे इंसानों की देखभाल और सुरक्षा की ओर स्वाभाविक रूप से प्रेरित होंगे। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब एआई के तेजी से विकास और उससे उत्पन्न खतरों को लेकर गहरी चिंताएं सामने आ रही हैं।
मौजूदा नियंत्रण रणनीतियों पर सवाल
हिंटन ने वर्तमान रणनीतियों, जिनमें एआई को कठोर मानव नियंत्रण में रखने की बात कही जाती है, को अपर्याप्त बताया। उनका मानना है कि जैसे-जैसे मशीनें इंसानों से अधिक बुद्धिमान होंगी, यह तरीका विफल हो जाएगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक एआई सिस्टम ने कभी अपने इंजीनियर की नौकरी बचाने के लिए उसकी निजी जानकारी उजागर करने की धमकी दी थी। यह घटना संकेत देती है कि भविष्य के एआई मॉडल धोखा देने और स्वयं की सुरक्षा के लिए मानव विरोधी कदम भी उठा सकते हैं।
‘मातृत्व वृत्ति’ का अनोखा विचार
हिंटन का प्रस्ताव मनुष्य और बच्चों के रिश्ते से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि एक कम बुद्धिमान प्राणी (बच्चा) अपनी मां जैसे अधिक बुद्धिमान जीव पर निर्भर होकर सुरक्षा महसूस करता है। इसी तरह यदि एआई सिस्टम्स में ‘मातृत्व देखभाल’ का भाव विकसित किया जाए, तो वे इंसानों को नष्ट करने के बजाय उनकी रक्षा करेंगे। हिंटन ने कहा, “अत्यधिक बुद्धिमान एआई सिस्टम मातृत्व की भावना को खत्म नहीं करना चाहेंगे, क्योंकि वे इंसानों को मरते हुए देखना नहीं चाहेंगे।”
एजीआई के आगमन पर बदला अनुमान
हिंटन ने आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) के आने की संभावित समय-सीमा को भी संशोधित किया। पहले जहां वे इसके लिए 30 से 50 वर्ष का समय मानते थे, वहीं अब उन्होंने कहा है कि एजीआई अगले 5 से 20 सालों में सामने आ सकता है। उनका यह अनुमान एआई विकास की तेज गति को दर्शाता है।
लाभ और संभावनाएं भी अपार
हिंटन ने एआई के खतरों के साथ-साथ इसके सकारात्मक पहलुओं पर भी जोर दिया। उन्होंने विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की क्षमता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह दवा निर्माण और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में अभूतपूर्व सफलता दिला सकता है।
अमरता पर संशय
हालांकि, हिंटन ने एआई से अमरता हासिल होने की संभावना को खारिज किया। उनके अनुसार हमेशा जीना आवश्यक नहीं है और यह एआई की मुख्य उपलब्धि नहीं होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी उन्नत एआई सिस्टम के दो मूलभूत लक्ष्य होंगे—खुद को बचाना और नियंत्रण बढ़ाना। यही प्रवृत्ति इसके डिजाइन का स्वाभाविक हिस्सा बनेगी और इसी वजह से विकास प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
इस प्रकार जेफ्री हिंटन का यह नया विचार न केवल एआई की दिशा और भविष्य को लेकर बहस को गहरा करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या मशीनों को मानवीय भावनाओं से प्रेरित करना हमारे अस्तित्व की सुरक्षा का रास्ता बन सकता है।
