बीस दिन में दो बाघ और एक तेंदुआ मौत का शिकार, बैठक के बीच मिला शव, जांच के निर्देश
गणेश पाण्डेय, भोपाल। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) और नर्मदापुरम कनज़र्वेंसी में बीते बीस दिनों में तीन वन्य प्राणियों की मौत से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। 15 जुलाई को बागरा बफर ज़ोन में टाइगर का शव मिला था, इसके बाद 12 अगस्त को मढ़ई क्षेत्र में एक और बाघ मृत पाया गया। अब इटारसी के पथरौटा पावर ग्रिड कैंपस में तेंदुए का शव मिलने से हालात और गंभीर हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मृत तेंदुआ करीब चार दिन पुराना है और प्रथम दृष्टया उसकी मौत बिजली करंट लगने से मानी जा रही है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं और विभाग की कार्यशैली पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
भीमकुंड गेट पर आपात बैठक के दौरान आई खबर
इसी बीच जब एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा वन्य प्राणियों की सुरक्षा और मुखबिर तंत्र को मजबूत करने के लिए एसटीआर, नर्मदापुरम सामान्य, बैतूल सामान्य और वन विकास निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ भीमकुंड गेट पर बैठक कर रही थीं, उसी दौरान तेंदुए के शव की खबर आई।

बैठक में एफडी राखी नंदा ने अधिकारियों को ठोस रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सबसे पहले आपसी समन्वय मजबूत करना होगा। इसके तहत रेंज अधिकारियों को संयुक्त नाइट गश्त, बैरियर पर सतत चेकिंग, वॉच टावरों पर नाइट स्टे और ग्रामीणों के बीच नियमित बैठकें करने को कहा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों और मुख्य बाजारों में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के संपर्क नंबर भी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए।
सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए मुखबिर तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राजस्व और बिजली विभाग के कर्मचारियों को भी इस कार्य से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने और सूचनाओं का तत्काल आदान-प्रदान सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
वन बल प्रमुख भी पहुंचे नर्मदापुरम
टाइगर और तेंदुए की मौत की घटनाओं ने वन मुख्यालय तक चिंता की लकीरें खींच दी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन बल प्रमुख व्ही. एन. अम्बाडे भी नर्मदापुरम पहुंचे। अम्बाडे ने कहा कि प्रदेश में टाइगर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए पहले ही सभी क्षेत्र संचालकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
वन विभाग का मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर तत्काल अंकुश न लगाया गया तो स्थिति और विकट हो सकती है। यही कारण है कि फील्ड स्तर से लेकर मुख्यालय तक लगातार निगरानी बढ़ाने और कठोर कदम उठाने की कवायद तेज़ हो गई है।
बीस दिनों में दो बाघ और एक तेंदुए की मौत न केवल वन्य प्राणी संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है बल्कि यह प्रदेश में वन्यजीव अपराधों की बढ़ती चुनौती की ओर भी इशारा करती है। अब देखना होगा कि विभाग की आपात बैठक और कड़े निर्देश आने वाले दिनों में कितने असरदार साबित होते हैं।
