IMG 20260608 WA0003

दो माह में बह गया ₹8 लाख का निर्माण

गणेश पाण्डेय, भोपाल। बालाघाट जिले में वन विभाग के एक निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दक्षिण सामान्य वनपरिक्षेत्र लामता के अंतर्गत कटंगनाला में करीब 8 लाख रुपये की लागत से निर्मित स्टॉप डेम पहली ही बारिश में बह गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि मामले में अब तक किसी अधिकारी, कर्मचारी या निर्माण एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट विभाग ने पूरे मामले को तेज जल प्रवाह का परिणाम बताकर फाइल बंद करने की कोशिश की। अब उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू होने से नए विवाद ने जन्म ले लिया है।

मामला दक्षिण सामान्य वनपरिक्षेत्र लामता के चाचेरी सर्किल के कक्ष क्रमांक 1330 स्थित कटंगनाला का है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2024-25 की कार्ययोजना में यहां स्टॉप डेम निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई थी। लगभग 8 लाख रुपये की लागत वाले इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर सामान्य वनमंडल लामता को सौंपी गई थी। निर्माण कार्य 25 फरवरी 2025 को प्रारंभ हुआ और महज एक माह के भीतर 22 मार्च 2025 को इसे पूर्ण घोषित कर दिया गया।

IMG 20260608 WA0002

सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद विभाग ने न केवल इसकी तकनीकी स्वीकृति प्रदान की बल्कि पूरी राशि का भुगतान भी कर दिया। लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल तब खड़े हुए जब मानसून की पहली बारिश में ही स्टॉप डेम पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बह गया। स्थानीय स्तर पर इसे निर्माण में गंभीर अनियमितता और निम्न गुणवत्ता का उदाहरण बताया जा रहा है।

निर्माण बहा, जिम्मेदारी नहीं तय हुई

सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये की सार्वजनिक राशि से बने इस निर्माण के ध्वस्त होने के बावजूद किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि घटना के बाद मामले को गंभीरता से लेने के बजाय इसे पानी के तेज बहाव का परिणाम मान लिया गया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता तो पहली ही बारिश में डेम के बहने जैसी स्थिति नहीं बनती। मामले की शिकायत भी संबंधित अधिकारियों तक पहुंची, लेकिन अब तक किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आई है।

पुनर्निर्माण शुरू, लेकिन बजट का कोई रिकॉर्ड नहीं

मामले का सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि जिस स्टॉप डेम का निर्माण पहली बारिश में बह गया था, उसी स्थान पर अब दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि पुनर्निर्माण के लिए राशि कहां से उपलब्ध कराई जा रही है।

IMG 20260608 WA0000

सूत्रों का दावा है कि विभागीय स्तर पर इस कार्य के लिए किसी नए बजट या स्वीकृति का रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं बिना औपचारिक स्वीकृति के निर्माण कार्य तो नहीं कराया जा रहा।

वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं जानकारी

मामले को और अधिक संदिग्ध तब माना जा रहा है जब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पुनर्निर्माण की जानकारी से अनभिज्ञता जाहिर की है। यदि वास्तव में निर्माण कार्य चल रहा है तो उसकी स्वीकृति किस स्तर पर दी गई, कार्यादेश किसे जारी हुआ और खर्च किस मद से किया जा रहा है, इन सवालों के जवाब फिलहाल सामने नहीं आए हैं।

डीएफओ ने जांच के दिए संकेत

मामले में जब बालाघाट डीएफओ रेशम सिंह धुर्वे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डीएफओ ने यह भी कहा कि उसी स्थान पर पुनः निर्माण कार्य कराए जाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में विभाग की ओर से इस कार्य के लिए कोई नई राशि या बजट मद जारी नहीं की गई है।

कई सवालों के जवाब बाकी

स्टॉप डेम का पहली ही बारिश में बह जाना, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का अभाव, शिकायतों के बावजूद जांच में देरी तथा बिना स्पष्ट बजट के दोबारा निर्माण कार्य शुरू होना ऐसे प्रश्न हैं जिनका जवाब अभी तक नहीं मिला है। अब सबकी निगाहें प्रस्तावित जांच पर टिकी हैं कि क्या यह मामला केवल निर्माण में लापरवाही का है या फिर सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की परतें भी सामने आएंगी।

IMG 20260608 WA0001

क्या है पूरा मामला?

कटंगनाला में वर्ष 2024-25 की कार्ययोजना के तहत लगभग 8 लाख रुपये की लागत से स्टॉप डेम बनाया गया था। 25 फरवरी 2025 को शुरू हुआ निर्माण 22 मार्च 2025 को पूर्ण घोषित कर दिया गया। विभाग ने भुगतान भी कर दिया, लेकिन पहली ही बारिश में डेम बह गया। इसके बाद भी किसी पर कार्रवाई नहीं हुई और अब उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू होने की खबरें सामने आ रही हैं।

जांच से सामने आ सकते हैं बड़े तथ्य

पुनर्निर्माण के लिए राशि कहां से आई, किसके निर्देश पर काम शुरू हुआ, मूल निर्माण में गुणवत्ता संबंधी मानकों का पालन हुआ या नहीं और जिम्मेदारी किसकी है—ये सभी सवाल अब जांच के दायरे में हैं। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो वन विभाग के निर्माण कार्यों की निगरानी और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।