संजय टाइगर रिजर्व में नियमों की अनदेखी, सीधी कलेक्टर पर लगे गंभीर आरोप
गणेश पाण्डेय, भोपाल। नौकरशाही को आईएफएस अफसरों की ACR लिखने का अधिकार मिलने पर वन्यप्राणी अधिनियम के नियमों और एनटीसीए के दिशा- निर्देशों का लगातार उल्लंघन करने से संकोच नहीं कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण सीधी कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी का कृत्य है, जिन्होंने संजय टाइगर रिजर्व के कोर एरिया अपनी निजी जिप्सी ड्राइव करते हुए ले गए और पुरे दंभ भरते हुए कह रहें कि उन्होंने कोई उलझन नहीं किया है। इसके पहले भी वे वन्यजीव अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन कर चुके हैं।
इसकी शिकायत RTI एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्य सचिव, वन बल प्रमुख, पीसीसीएफ वन्य प्राणी और एनटीसीए से की है। दुबे ने अपनी शिकायत में कहा है कि मुझे बताया गया है कि वे नियमित रूप से हर सप्ताह दोस्तों के साथ रिजर्व में आते हैं और पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हैं। इसके अलावा, वे वन अधिकारियों पर भी दबाव बना रहे हैं। ये महाशय विशेष रूप से हर बुधवार दोपहर को सफारी पर जाते है, क्योंकि उस समय टाइगर रिजर्व नियमित पर्यटकों के लिए बंद रहता है। उनकी गाड़ी देर रात तक प्रतिबंधित कोर एरिया में अक्सर खड़ी दिखाई देती है। यही नहीं, वे बाघों के बेहद करीब पहुंच जाते हैं। दुबे ने मुख्य सचिव से इस घटना की जांच कराने और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है। दुबे का दावा है कि सीधी जिलाधीश की गतिविधियों को सीधी से दुबरी, संजय टाइगर रिजर्व के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों से सत्यापित किया जा सकता है।
पूर्व में भी हो सोमुवंशी और शुक्ला कर चुके हैं नियमों का उल्लंघन
सीधी में संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल सेंचुरी और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले बाघ गलियारे में मंजूरी के बिना निर्माण कार्य को लेकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के सहायक वन महानिरीक्षक हेमंत सिंह ने प्रमुख सचिव वन मध्य प्रदेश को पत्र लिखकर कार्यवाही कर पालन प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए हैं। जबकि राष्ट्रीय वन्य प्राणी सलाहकार बोर्ड ने टाइगर कॉरिडोर में हुए विस्तारित ढांचे को तत्काल ध्वस्त करने और पीएस पर्यटन शिवशेखर शुक्ला और सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी के फारेस्ट एक्ट के उल्लंघन करने पर कार्रवाई करने की हिदायत दी है। दिलचस्प पहलू यह है कि केंद्रीय मंत्री यादव ने इमारत को तुरंत ध्वस्त करने का आदेश देते हुए कहा है कि उल्लंघन के लिए जिम्मेदार प्रमुख सचिव (पर्यटन और संस्कृति) शिव शेखर शुक्ला और सीधी के जिला कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत कार्रवाई करने की हिदायत दी है। साथ ही उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा है। आज तक राज्य शासन की ओर से कोई भी पालन प्रतिवेदन नहीं भेजा गया।
सीधी कलेक्टर पर लगे आरोप
✔ निजी जिप्सी से कोर एरिया में जाने का आरोप।
✔ बाघों के बेहद करीब पहुंचने की बात सामने आई।
✔ पर्यटकों से दुर्व्यवहार और वन अधिकारियों पर दबाव डालने के आरोप।
✔ सीसीटीवी कैमरों से गतिविधियों की पुष्टि किए जाने की मांग।
फॉरेस्ट अफसर की आपत्ति पर ताजी नहीं देते नौकरशाह
अमूमन यह देखा गया है कि राज्य के नौकरशाह वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कानून को लेकर जब-जब आईएफएस अधिकारियों ने किसी मुद्दे को लेकर आपत्तियों की है या फिर सुझाव दिए हो, उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है। इसकी ताज़ा उदाहरण किसी को भी सीधी में टाइगर कॉरिडोर में पर्यटन विभाग द्वारा पक्का निर्माण किया जाना है।
