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पीथमपुर की हर्बल यूनिट पर वन विभाग का शिकंजा

गणेश पाण्डेय, भोपाल। कभी वन मेलों में वन संरक्षण, जैव विविधता और हर्बल उत्पादों को बढ़ावा देने वाली नेचरल लिविंग इंडस्ट्रीज अब खुद वन विभाग की जांच और कार्रवाई के घेरे में आ गई है। धार जिले के सागरकुटी स्थित कंपनी परिसर में वन विभाग की टीम ने दबिश देकर बड़ी मात्रा में विभिन्न प्रजातियों की छाल और बीज का संग्रहण पकड़ा है। दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर विभाग ने जैव विविधता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर सामग्री को सील कर दिया है।

वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद अवैध वन उपज कारोबार, जैव विविधता नियमों के उल्लंघन और कथित संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों का दावा है कि मामले की जांच आगे बढ़ने पर अंतरराज्यीय वन उपज नेटवर्क से जुड़े अहम खुलासे हो सकते हैं।

सूचना मिलते ही फैक्ट्री पहुंची वन विभाग की टीम

वन विभाग के अनुसार 27 मई 2026 को प्राप्त सूचना के आधार पर डीएफओ धार विजयानंथम टी.आर. और वन परिक्षेत्र अधिकारी सचिन सयदे के नेतृत्व में टीम ने सागरकुटी स्थित यूनिट का निरीक्षण किया। जांच के दौरान गोदाम क्रमांक-1 एच-2 में विभिन्न प्रजातियों की छाल और बीज बड़ी मात्रा में संग्रहित पाए गए।

जब अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन से वैध दस्तावेज मांगे तो कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसके बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए सामग्री को सील कर दिया।

जैव विविधता अधिनियम के तहत दर्ज हुआ प्रकरण

वन विभाग ने प्रकरण क्रमांक 255/19 के तहत जैव विविधता अधिनियम 2002 की धारा-7 में मामला दर्ज किया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि गोदाम में रखी गई छाल और बीज की प्रजातियों तथा उनके स्रोत की जांच की जा रही है।

प्राथमिक जांच इस बात पर केंद्रित है कि संग्रहित वन उपज वैध रूप से प्राप्त की गई थी या उसका संबंध किसी अवैध कारोबार से है।

पुरानी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल

मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि इस यूनिट के खिलाफ शिकायतें नई नहीं हैं। जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2025 में भी फैक्ट्री की गतिविधियों को लेकर विभागीय स्तर पर शिकायत की गई थी। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई।

अब सवाल उठ रहे हैं कि शिकायतों के बावजूद समय रहते जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई तथा यूनिट को सील क्यों नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि मौजूदा डीएफओ विजयानंथम टी.आर. के संज्ञान में मामला आने के बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

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वन विभाग की जांच में खुल सकते हैं बड़े राज

सूत्रों के अनुसार जांच केवल जब्त सामग्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसके स्रोत, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला की भी पड़ताल की जा रही है। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि कहीं विभिन्न राज्यों से वन उपज लाकर बिना आवश्यक अनुमति के उसका भंडारण और व्यापार तो नहीं किया जा रहा था।

उद्योग प्रबंधन से मांगी गई विस्तृत जानकारी

डीएफओ धार विजयानंथम टी.आर. ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि स्थानीय मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर निरीक्षण किया गया था और पूरे मामले की गंभीरता से जांच जारी है।

उन्होंने बताया कि कंपनी के प्रबंध संचालक को पत्र जारी कर संबंधित उद्योगों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा जैव विविधता अधिनियम के तहत आवश्यक पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल सील की गई छाल और बीज की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कंपनी ने जैव विविधता और वन उपज संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं। वहीं, विभागीय और वन महकमे के हलकों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यह कार्रवाई किसी बड़े वन उपज नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकती है।