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लखनऊ

यूपी में पंचायत चुनाव समय पर न होने से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो जाएगा। ऐसे में प्रशासक समिति के माध्यम से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। पंचायती राज विभाग की ओर से शासन को प्रशासक समिति के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को ही बागडोर सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है। ग्राम प्रधान के साथ ही ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी प्रशासक समिति के माध्यम से बढ़ाया जाएगा। प्रधानों और अध्यक्षों कार्यकाल बढ़ाकर भाजपा सरकार की कोशिश उनकी हमदर्दी हासिल करने की है। माना जा रहा है कि अब पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे। ऐसे में कार्यकाल बढ़ाए गए प्रधान और अध्यक्ष विधानसभा चुनाव में भाजपा के काम आ सकते हैं। हालांकि प्रधानी की तैयारी में लगे लोगों को इस फैसले से झटका भी लगेगा। ऐसे में यह लोग नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

पहली बार ट्रिपल टेस्ट से ओबीसी आरक्षण होगा तय
वहीं, पंचायत चुनावों में पहली बार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित कर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी का आरक्षण तय किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2023 में नगर निकाय चुनावों में पहली बार इसे लागू कर आयोग गठित किया गया था। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में रैपिड सर्वे से आरक्षण तय किया गया था। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल छह महीने का तय किया गया है। अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक या जून के प्रथम सप्ताह में होने की उम्मीद है।

यह आयोग पिछड़नेपन की प्रकृति व प्रभावों की समकालीन, सतत व अनुभवजन्य जांच और अध्ययन, पिछड़ा वर्ग के आंकड़े न होने पर सर्वे और फिर आरक्षण तय करेगा। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव रैपिड सर्वे से हुआ था और वर्ष 2015 के ओबीसी आंकड़े भी रखे गए थे। क्योंकि उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान की तर्ज पर यूपी में भी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।

वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव चार चरणों में अप्रैल-मई में हुए थे। दूसरी ओर अब राज्य निर्वाचन आयोग भी अपना काम तेजी से करेगा। लगातार पांचवीं बार अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ाकर 10 जून की गई है। अब 10 जून को पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की उम्मीदें हैं।

विस चुनाव से पहले पंचायत चुनाव की संभावना कम
विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होना आसान नहीं होगा। क्योंकि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल जून से अगर शुरू हुआ तो यह नवंबर तक रहेगा। वहीं आयोग ने रिपोर्ट देने में समय लगाया तो शासन इसका कार्यकाल बढ़ा सकता है।

फिलहाल, सत्तापक्ष ही नहीं विपक्षी दल भी पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर शांत हैं। ऐसे में ज्यादा उम्मीदें विधानसभा चुनाव के बाद हों। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में वहां से जो दिशा-निर्देश मिलेंगे उसका सरकार पालन करेगी।

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