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नई दिल्‍ली
मिडिल ईस्‍ट में तनाव और तेल की कीमतें ऊपर जाने के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम में अभी तक दो बार बढ़ोतरी की गई है और आगे भी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इन सबसे परे सरकार एक और बड़ा झटका देने की तैयारी कर रही है, जिसका बोझ आम आदमी के ऊपर आ सकता है। 

दरअसल, पिछले कुछ समय से भारतीय करेंसी (Rupee) में बड़ी गिरावट देखी गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया एक साल के दौरान 10 से 12 फीसदी तक गिर गया है. ऐसे में कई एक्‍सपर्ट्स रुपये को 100 लेवल के पार जाने की संभावना जता रहे हैं. इस बीच, RBI कई बड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके।  

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में स्थिरता लाने के लिए आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर रहा है. साथ ही करेंसी ट्रांसफर और डॉलर जुटाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. ऐसे में अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी की जाती है तो इस संकट के समय में आपके बैंक लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी, जो मिडिल क्‍लास के लिए एक बड़े झटके से कम नहीं होगा। 

रुपया 97 के करीब पहुंचने पर बढ़ी टेंशन 
बुधवार को रुपये के नए रिकॉर्ड लो ने सिर्फ देश के लोगों को ही चिंता में नहीं डाल दिया, बल्कि RBI अधिकारी भी तनाव में आ गए. रिपोर्ट का दावा है कि 97 के करीब रुपया पहुंचने के बाद  गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत कई शीर्ष अधिकारियों ने संभावित उपायों पर चर्चा करने के लिए आंतरिक बैठकें की हैं। 

क्‍या-क्‍या उपाय कर सकता है आरबीआई? 
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि उपलब्ध विकल्पों में से एक ब्याज दरों में वृद्धि करना है. आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी की अलगी बैठक 5 जून को होगा, जिसमें रेपो रेट बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है. अन्‍य उपायों में एनआरआई डिपॉजिट स्‍कीम के माध्‍यम से विदेशों से डॉलर जुटाना और सॉवरेन डॉलर बॉन्ड बेचना शामिल है। 

2013 से मिलता-जुलता दिख रहा ये उपाय 
विचाराधीन उपाय 2013 के टेपर टैंट्रम काल के दौरान उठाए गए कुछ उपायों से मिलते-जुलते हैं. उस समय भारत ने विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बैंकों के माध्यम से NRIs के लिए डिपॉजिट स्‍कीम शुरू की थीं. आरबीआई का अनुमान है कि इस बार इन योजनाओं से 50 अरब डॉलर तक की राशि आ सकती है, जबकि पहले यह राशि लगभग 30 अरब डॉलर थी। 

बता दें RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 जून तक होनी है. समिति ने इस साल अपनी मानक दर को 5.25% पर अनचेंज रखा है, हालांकि ज्‍यादातर इकोनॉमिस्‍ट में तेजी के कारण आने वाले महीनों में इसमें तेजी की भविष्यवाणी कर रहे हैं।  

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