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 नई दिल्ली

भारतीय टीम जब इंग्लैंड और आयरलैंड के चुनौतीपूर्ण दौरे की तैयारियों में जुटी है, तभी एक और चोट ने उसकी योजनाओं को झटका दे दिया है. युवा ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोटिल होकर आयरलैंड टी20 सीरीज से बाहर हो गए हैं और अब उनके इंग्लैंड दौरे के बड़े हिस्से से भी दूर रहने की आशंका है। 

नीतीश को हालिया अफगानिस्तान वनडे सीरीज के दौरान बाएं पैर की क्वाड्रिसेप्स (जांघ की मांसपेशी) में चोट लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य समस्या माना गया था, लेकिन एमआरआई रिपोर्ट ने तस्वीर बदल दी. मेडिकल जांच में मांसपेशी में सूजन और फाइबर डैमेज सामने आया है, जिसके बाद उन्हें आगे के मूल्यांकन और रिहैबिलिटेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) बुलाया गया है। 

सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी रिकवरी में कम से कम चार सप्ताह लग सकते हैं. इसके बाद ही वह 'रिटर्न टू प्ले' प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे. ऐसे में आयरलैंड सीरीज तो लगभग हाथ से निकल चुकी है, जबकि इंग्लैंड दौरे में उनकी उपलब्धता भी संदेह के घेरे में है. आयरलैंड में 2 मुकाबले होेंगे, पहला टी20 26 जून और दूसरा 28 जून को खेला जाएगा। 

हार्दिक के विकल्प के तौर पर देखे जा रहे थे नीतीश
नीतीश की चोट ऐसे समय आई है जब टीम पहले से ही हार्दिक पंड्या की फिटनेस को लेकर सतर्क है. हार्दिक भी क्वाड्रिसेप्स की समस्या से जूझ रहे हैं और फिलहाल वनडे क्रिकेट में पूरे 10 ओवर फेंकने की स्थिति में नहीं हैं। 

यही वजह थी कि टीम मैनेजमेंट नीतीश रेड्डी को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में देख रहा था जो बल्लेबाजी के साथ तेज गेंदबाजी में भी योगदान दे सके. लेकिन अब दोनों प्रमुख पेस-बॉलिंग ऑलराउंडरों की फिटनेस चिंता का विषय बन गई है। 

रफ्तार बढ़ी, लेकिन शरीर ने दिया जवाब?
क्रिकेट जगत में चर्चा है कि तेज गेंदबाजी कोच स्टेफन जोन्स के साथ काम करने के बाद नीतीश की रफ्तार काफी बढ़ी है. पहले वह करीब 125-128 किमी प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी करते थे, लेकिन हाल के महीनों में उनकी स्पीड 130-135 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई। 

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि गेंदबाजी की रफ्तार बढ़ने पर शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. ऐसे बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है और इस दौरान चोट का खतरा भी बढ़ सकता है. हालांकि नीतीश की चोट का कारण यही है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

करियर के शुरुआती दौर में बड़ा इम्तिहान
महज 23 साल के नीतीश अब तक भारत के लिए 10 टेस्ट, 6 वनडे और 4 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में उन्होंने दो वनडे खेले थे, जबकि दूसरा मैच चोट के कारण नहीं खेल पाए थे। 

युवा ऑलराउंडर ने पिछले एक साल में तेजी से अपनी पहचान बनाई है, लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मैदान पर वापसी की है. भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि यह चोट लंबी न खिंचे, क्योंकि आने वाले महीनों में टीम को ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत होगी जो बल्ले और गेंद दोनों से मैच का रुख बदल सकें। 

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