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नईदिल्ली 
उत्तर प्रदेश सरकार ने आधार कार्ड को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. जानकारी बेहद अहम है, क्‍योंकि मामला सीधे आपसे जुड़ा हुआ है. यूपी सरकार ने साफ आदेश जारी कर दिया है कि अब आधार कार्ड जन्म प्रमाणपत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) या जन्मतिथि के सबूत के तौर पर मान्य नहीं होगा. योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने इसको लेकर सभी विभागों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं. उनका कहना है कि आधार में जन्मतिथि तो होती है, लेकिन इसका कोई जन्म प्रमाण पत्र लिंक नहीं होता, इसलिए इसे बर्थ सर्टिफिकेट नहीं माना जा सकता.

विशेष सचिव अमित सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के पत्रांकः 16013/4/2020-RO-LKO/5416 दिनांक 31 अक्‍टूर में बताया गया है कि आधार कार्ड जन्मतिथि का अनुमन्य प्रमाण यानि अनुमन्य प्रमाण नहीं है. हालांकि राज्य सरकार के कई विभागों द्वारा अभी भी आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है. इसलिए सभी विभागों को इस बारे में जानकारी दी जा रही है. लिहाजा, आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न किये जाने के संबंधित निर्देश आप अपने मातहत विभागों को दें.

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि धोखाधड़ी बंद हो जाएगी. आजम खान जैसे लोग अपने बच्चों को विधायक बनाने के लिए पैन कार्ड बदलकर उम्र घटा देते हैं… यह बहुत अच्छा फैसला है, इसका सभी को स्वागत करना चाहिए.

दूसरी तरफ सपा सांसद लालजी वर्मा ने इसे पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के खिलाफ साजिश बताया है. उनका आरोप है कि आधार को पहचान दस्तावेज में जोड़ने से ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से कट सकते हैं, जिनके पास आधार ही एकमात्र प्रमाण है.

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