IAS संतोष वर्मा को बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा, फर्जी पदोन्नति आदेश और विवादित बयानों पर शुरू हुई कार्रवाई

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मध्य प्रदेश सरकार ने कहा—जांच में दस्तावेज जाली मिले, सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन

गणेश पाण्डेय, भोपाल। विवादित बयानों और गंभीर आरोपों में घिरे आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने निर्णायक कदम उठाते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। विभागीय जांच में यह पाया गया कि वर्मा की आईएएस पद पर पदोन्नति कथित तौर पर जाली दस्तावेजों और फर्जी आदेशों के आधार पर की गई थी, जो अखिल भारतीय सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है।

सरकार ने गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने यह कार्रवाई शुरू की है और केंद्र को भेजी गई सिफारिश में कहा गया है कि वर्मा को आईएएस कैडर में पदस्थ करने के लिए तैयार किया गया पदोन्नति आदेश “फर्जी और जाली” था। इस मामले से जुड़े कई आपराधिक मुकदमे पहले ही अदालतों में लंबित हैं।

जांच रिपोर्ट में खुलासा—सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र भी फर्जी

वर्मा के खिलाफ की गई विभागीय जांच में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में पाया गया कि—

  • वर्मा ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र (इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट) हासिल किया था।
  • सरकार की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर उनकी प्रतिक्रिया असंतोषजनक पाई गई।
  • जांच प्रक्रिया के दौरान भी उन्होंने अभद्र और भड़काऊ बयान देना जारी रखा।

इन स्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के तहत उनके खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र जारी करने का निर्णय लिया है।

न्यायिक हेरफेर का आरोप—एक जज के साथ मिलकर बरी होने की कोशिश

इंदौर की अदालतों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, संतोष वर्मा ने एक घरेलू मामले में स्वयं को बरी कराने के लिए मनगढ़ंत फैसले तैयार करने की साजिश allegedly एक न्यायाधीश के साथ मिलकर रची।
इस कथित षडयंत्र का उद्देश्य विभागीय पदोन्नति समिति में अर्हता प्राप्त कर आईएएस पदोन्नति का मार्ग साफ करना था।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्मा ने न्यायिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर पदोन्नति के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए थे।

विवादित बयान ने बढ़ाई मुश्किलें—23 नवंबर का भाषण बना नया तूफान

23 नवंबर 2025 को भोपाल में आयोजित AJJAKS (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) के सम्मेलन में वर्मा ने अत्यंत विवादित बयान दिया था।
उन्होंने कहा—

“रिजर्वेशन तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को न दे दे, या उसका उससे रिश्ता न हो जाए।”

इस बयान की ब्राह्मण संगठनों, समुदाय के नेताओं और सामाजिक समूहों ने कड़ी आलोचना की। इसे
“अभद्र, जातिवादी और ब्राह्मण बेटियों का अपमान करने वाला” बयान बताया गया।

यह बयान पहले से चल रही जांच और आरोपों के बीच उनके खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने वाला साबित हुआ।

इन आरोपों पर कार्रवाई

  • जाली पदोन्नति आदेश पर आधारित आईएएस कैडर में नियुक्ति
  • सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने की पुष्टि
  • न्यायिक रिकॉर्ड में कथित हेरफेर
  • जांच दौरान भी आपत्तिजनक, भड़काऊ टिप्पणियाँ
  • विवादित भाषण ने मामला और उग्र किया
  • केंद्र सरकार को बर्खास्तगी का औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया