BHOPAL NAGAR NIGAM MEETING

2600 करोड़ से बदलेगा राजधानी का इंफ्रास्ट्रक्चर, 829 कॉलोनियों में मिलेंगे व्यक्तिगत नल कनेक्शन; ग्रीन बांड से जुटेंगे 200 करोड़

IBN, भोपाल। राजधानी भोपाल में वर्षों से चली आ रही जलापूर्ति और सीवेज व्यवस्था की समस्याओं को स्थायी समाधान देने के लिए नगर निगम अब तक की सबसे बड़ी अधोसंरचना योजना पर काम कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 2600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर शहर में नई पानी की पाइपलाइन बिछाई जाएगी, सीवेज नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा और 829 कॉलोनियों के रहवासियों को व्यक्तिगत नल कनेक्शन दिए जाएंगे।

योजना के मुताबिक केवल जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर 582 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि से शहर में करीब 541 किलोमीटर लंबी नई पानी की पाइपलाइन डाली जाएगी। इसके साथ ही पानी के भंडारण और वितरण को बेहतर बनाने के लिए ओवरहेड टैंक और सैंपवेल टैंक भी बनाए जाएंगे। इस प्रस्ताव को महापौर परिषद से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे 13 जनवरी को होने वाली भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में अंतिम चर्चा और स्वीकृति के लिए रखा जाएगा।

829 कॉलोनियों में व्यक्तिगत नल कनेक्शन

भोपाल में वर्तमान में कुल 1566 कॉलोनियां हैं, जिनमें से 829 कॉलोनियों में बल्क कनेक्शन के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इससे कई इलाकों में पानी के दबाव, वितरण और गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें आती रही हैं। अब नगर निगम ने इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत नल कनेक्शन देने का निर्णय लिया है।
इन कॉलोनियों के 74,905 आवासों में स्मार्ट मीटर के जरिए जलापूर्ति की जाएगी। इसके लिए पाइपलाइन बिछाने, इंटरकनेक्शन, वॉल्वमेन, ऑपरेटर और सुपरवाइजर की व्यवस्था सहित कुल 801 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। स्मार्ट मीटर पर प्रति आवास करीब 9709 रुपये खर्च होंगे, जिससे 72.73 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा। इस तरह व्यक्तिगत नल कनेक्शन पर कुल खर्च 874.43 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।

सीवेज नेटवर्क और जलाशयों पर भी बड़ा निवेश

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के अनुसार, अमृत 2.0 योजना के तहत शहर में 1113.47 करोड़ रुपये से सीवेज नेटवर्क को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अलावा करीब 62 करोड़ रुपये जलाशयों के जीर्णोद्धार पर खर्च होंगे। अमृत 2.0 के अंतर्गत जलापूर्ति, सीवेज और जलाशयों से जुड़े कार्यों पर कुल 1757.2 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसमें से 1263.5 करोड़ रुपये केंद्र और राज्य सरकार के अंश के रूप में मिलेंगे, जबकि 493.49 करोड़ रुपये नगर निगम को स्वयं के स्रोतों से जुटाने होंगे। नगर निगम इस राशि में से 200 करोड़ रुपये ग्रीन म्यूनिसिपल बांड के जरिए जुटाने की तैयारी कर रहा है, जिससे पर्यावरण–अनुकूल परियोजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

विवाह पंजीयन शुल्क में बड़ी राहत

13 जनवरी को होने वाली परिषद बैठक के एजेंडे में विवाह पंजीयन शुल्क में बदलाव का प्रस्ताव भी शामिल है। अभी तक विवाह पंजीयन के लिए 1100 रुपये शुल्क और विलंब पर अधिकतम 5000 रुपये तक देना पड़ता था। नए प्रस्ताव के अनुसार यदि विवाह के 30 दिन के भीतर आवेदन किया जाता है, तो सिर्फ 130 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। 30 दिन बाद आवेदन करने पर शुल्क 1100 रुपये रहेगा, लेकिन अधिकतम विलंब शुल्क की सीमा समाप्त हो जाएगी। इससे नागरिकों को करीब 3900 रुपये की सीधी राहत मिलेगी।

निष्कर्ष: जल, सीवेज और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी यह विशाल योजना भोपाल के शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में राजधानी को स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।