वन भवन भोपाल

टाइगर मैनेजमेंट पर उठे गंभीर सवाल, फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय से हॉफ ने मांगा स्पष्टीकरण

गणेश पाण्डेय, भोपाल। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर अपने टाइगर मैनेजमेंट सिस्टम को लेकर विवादों में घिर गया है। 8 महीने की मादा शावक के बठान एंक्लोजर से फरार होने, फिर उसकी जगह किसी अन्य शावक की अंत्येष्टि किए जाने और अब एक बाघ का शव कुएं में मिलने से पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला

➡ 6 जनवरी: बठान एंक्लोजर से 8 महीने की मादा शावक लापता।
➡ 7 जनवरी: प्रबंधन ने एक हमउम्र शावक की अंत्येष्टि कर दावा किया कि फरार शावक की मौत हो चुकी है।
➡ 9 जनवरी: धारियों के मिलान के बाद माना गया कि अंत्येष्टि किसी और शावक की हुई थी।
➡ अब: फरार शावक की तलाश फिर से शुरू, लेकिन कोई सुराग नहीं।

धारियों से खुला सच

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के एसडीओ दीपक मराठा के अनुसार,
“धारियों के पैटर्न के मिलान से स्पष्ट हुआ कि जिसकी अंत्येष्टि हुई थी, वह फरार शावक नहीं थी।”

इसके बाद प्रबंधन ने स्वीकार किया कि फरार शावक अब भी जीवित हो सकती है, जिसकी तलाश हाथियों के दल और विशेष टीम द्वारा की जा रही है।

बताया जा रहा है कि जिसकी अंत्येष्टि हुई थी, वह बफर जोन की एक टाइग्रेस का शावक था।

टाइगर की पहचान कैसे होती है

✔ धारियों का पैटर्न: हर बाघ की धारियां फिंगरप्रिंट की तरह अलग होती हैं।
✔ पंजों के निशान (Pugmarks): ट्रैकिंग और गिनती में सहायक।
✔ कैमरा ट्रैप: फोटो के जरिए स्ट्राइप पैटर्न का मिलान।
✔ वैज्ञानिक रिकॉर्ड: इन्हीं आधारों पर बाघों की पहचान और जनगणना होती है।

कुएं में मिला बाघ का शव

धमोखर बफर क्षेत्र के रायपुर बीट अंतर्गत कुदरी टोला गांव के एक कुएं में 8 जनवरी को एक बाघ मृत अवस्था में मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

9 जनवरी को डॉग स्क्वाड से जांच कर शव को बाहर निकाला गया और अंत्येष्टि की गई। शव अत्यधिक पुराना होने के कारण कुएं को खाली कर सभी अवशेष जब्त किए गए।

फील्ड डायरेक्टर को नोटिस

वन बल प्रमुख वी.एन. अंबाड़े ने फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय को नोटिस जारी करते हुए कहा कि—

➡ मादा शावक के लापता होने
➡ कुएं में बाघ का शव मिलने
इन दोनों मामलों की जांच कर 7 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश को भेजी जाए।

पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि शावकों को पनपथा बफर से ताला क्षेत्र के बठान एंक्लोजर में शिफ्ट करते समय यह लापरवाही सामने आई।

टाइगर मैनेजमेंट पर उठे सवाल

लगातार सामने आ रही घटनाओं से यह स्पष्ट हो रहा है कि—

➡ निगरानी प्रणाली कमजोर है।
➡ रिकॉर्ड प्रबंधन में भारी चूक है।
➡ आपात स्थिति में त्वरित निर्णय क्षमता पर सवाल हैं।

वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते सटीक पहचान की जाती, तो यह शर्मनाक स्थिति पैदा नहीं होती।

बांधवगढ़ जैसे प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व में इस तरह की प्रशासनिक चूक न केवल वन विभाग की साख पर सवाल खड़े करती है, बल्कि बाघ संरक्षण अभियान की विश्वसनीयता को भी कमजोर करती है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।