कार्बन नैनोट्यूब मोटर: वजन 80% तक कम, क्षमता 133% ज्यादा
नई दिल्ली/सियोल। ट्रांसपोर्टेशन तकनीक की दुनिया में सबसे बड़ी चुनौती मानी जाने वाली समस्या वाहनों का वजन अब इतिहास बनने की ओर बढ़ रही है। दक्षिण कोरिया के कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (किस्ट) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी इलेक्ट्रिक मोटर विकसित की है, जिसने तांबे के कॉइल्स को लगभग पूरी तरह अप्रासंगिक बना दिया है। इस नई तकनीक में मोटर को चलाने के लिए कार्बन नैनोट्यूब का इस्तेमाल किया गया है, जिससे मोटर का वजन पारंपरिक मोटरों की तुलना में करीब 80 प्रतिशत तक कम हो गया है, जबकि इसकी विद्युत चालकता में 133 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
अब तक इलेक्ट्रिक मोटर्स में तांबे के कॉइल्स का उपयोग होता रहा है, जो करंट के जरिए मैग्नेटिक फील्ड बनाकर मोटर को घुमाते हैं। लेकिन तांबा भारी होता है और मोटर की मेटल केसिंग के साथ मिलकर पूरे सिस्टम का वजन काफी बढ़ा देता है। कोरियाई वैज्ञानिकों ने तांबे की जगह कार्बन नैनोट्यूब का उपयोग कर एक मेटल-फ्री मोटर तैयार की है, जो न केवल हल्की है, बल्कि ज्यादा कुशल भी साबित हो रही है।
लोहे से ज्यादा मजबूत, तांबे से ज्यादा हल्का
कार्बन नैनोट्यूब लोहे से कई गुना मजबूत और तांबे से कहीं ज्यादा हल्के होते हैं। यही वजह है कि इस मोटर ने वजन कम करने के साथ-साथ मजबूती और स्थायित्व भी बनाए रखा है। टेस्टिंग में यह मोटर कम ऊर्जा में ज्यादा आउटपुट देने में सक्षम पाई गई, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की परफॉर्मेंस में बड़ा सुधार संभव है।
कैसे मुमकिन हुआ यह आविष्कार
कार्बन नैनोट्यूब के इस्तेमाल में सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इनमें मेटल पार्टिकल्स रह जाते थे, जिससे कंडक्टिविटी घट जाती थी। कोरिया के वैज्ञानिकों ने लिक्विड क्रिस्टल तकनीक आधारित एक नया प्यूरिफिकेशन प्रोसेस विकसित किया। इस तकनीक से नैनोट्यूब की संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना सभी अशुद्धियां निकाल दी गईं। परिणामस्वरूप कंडक्टिविटी में 133% की बढ़ोतरी होगी साथ ही मोटर का वजन 80% तक कम हो जाएगा।
इलेक्ट्रिक कारों से लेकर अंतरिक्ष यान तक असर
यह खोज केवल इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित नहीं रहने वाली। वैज्ञानिकों के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियां अब एक बार चार्ज करने पर ज्यादा दूरी तय कर सकेंगी। ड्रोन हल्के होकर ज्यादा देर तक उड़ान भर सकेंगे। अंतरिक्ष यानों की पेलोड क्षमता बढ़ेगी। रोबोट और औद्योगिक मशीनें ज्यादा कुशल और हल्की बनेंगी। इससे बैटरी की खपत कम होगी और रेंज अपने आप बढ़ जाएगी।
भविष्य की तैयारी शुरू
कोरियाई वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज केवल शुरुआत है। आने वाले समय में इसी कार्बन तकनीक का उपयोग- बैटरी निर्माण, सेमीकंडक्टर, और हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में भी किया जाएगा, जिससे तकनीकी दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
ट्रांसपोर्टेशन की दिशा बदलने वाला कदम
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह खोज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एयरोस्पेस और रोबोटिक्स सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में गाड़ियां, ड्रोन और अंतरिक्ष यान पहले से कहीं ज्यादा हल्के, तेज और ऊर्जा-कुशल बन जाएंगे।
तांबे के युग से कार्बन के युग की ओर बढ़ता यह कदम सिर्फ एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भविष्य के परिवहन की नई परिभाषा है। किस्ट की यह खोज आने वाले समय में पूरी दुनिया की ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
