गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्य प्रदेश के उत्तर शहडोल क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। जयसिंहनगर क्षेत्र में मात्र 12 घंटे के भीतर एक बाघिन और एक बाघ की मौत से सनसनी फैल गई। दोनों के शव लगभग 100 मीटर की दूरी पर पाए गए। बाघिन की मौत आपसी संघर्ष में हुई, जबकि बाघ की जान बिजली के झटके से गई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मृत बाघिन के तीन शावक अब तक लापता हैं।
उत्तर शहडोल की डीएफओ तरुणा वर्मा ने बताया कि रविवार को सबसे पहले बाघिन का शव मिला, जबकि सोमवार को बाघ का शव बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में दोनों के अंग सुरक्षित पाए गए हैं। वन विभाग ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है, लेकिन शावकों का कोई सुराग नहीं मिला।
चार ग्रामीण गिरफ्तार, कई पर केस
बाघ की बिजली के झटके से हुई मौत के मामले में करपा गांव के चार ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा जिन अन्य लोगों के खेतों में बिजली के तार लगाए गए थे, उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और वन विभाग ने क्षेत्र में अवैध विद्युत जालों की सघन जांच शुरू कर दी है।
वन बल प्रमुख के निर्देश, ज़मीन पर बेअसर
लगातार हो रही मौतों के बीच वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े ने पहले ही फील्ड अधिकारियों को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए थे। टाइगर रिजर्व और फील्ड स्टाफ को ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप’ और इसके दूसरे चरण के तहत विशेष अभियान चलाने को कहा गया था। इसके बावजूद उत्तर शहडोल की यह घटना बताती है कि मुख्यालय से जारी निर्देश फील्ड स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं। जनवरी माह में ही प्रदेश में नौ बाघिनों की मौत हो चुकी है। इन ताज़ा दो मामलों के बाद यह संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
बिजली के झूलते तार बन रहे जानलेवा
वन विभाग के आंकड़े हालात की गंभीरता को उजागर करते हैं। 2014 से 2025 के बीच बिजली के अवैध जाल और खुले तारों के कारण 39 बाघों सहित 933 जंगली जानवरों की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकांश घटनाएं सर्दियों के मौसम में सामने आई हैं। 16 जनवरी को बांधवगढ़ में भी इसी तरह बिजली के झटके से एक बाघ की मौत हुई थी।
जवाबदेही तय करने की मांग
लगातार हो रही घटनाओं को लेकर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों में आक्रोश है। वन्यजीव एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा कि यह लापरवाही अब बर्दाश्त के बाहर है। मध्य प्रदेश के वन्यजीव विभाग में जवाबदेही तय करने का समय आ गया है और संरक्षण से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी को तत्काल हटाने की मांग की गई है।
उत्तर शहडोल की यह घटना न सिर्फ वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अगर बिजली के अवैध जाल और फील्ड निगरानी पर सख्ती नहीं हुई, तो बाघ संरक्षण के दावे कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगे।
