Jabalpur high court

बांधवगढ़ में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त

गणेश पाण्डेय, भोपाल। प्रदेश हाईकोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने स्वीकार किया है कि उमरिया वन क्षेत्र में करंट से मारे गए चार बाघों में से एक की मौत सोलर फेंसिंग से हुई। न्यायालय ने बाघों की बढ़ती मृत्यु दर, प्रत्येक मामले के कारण और जिम्मेदारों पर की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित है।

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की जनहित याचिका पर दायर स्थिति रिपोर्ट में बताया गया कि नवंबर 2025 से 24 फरवरी 2026 के बीच आठ बाघों की मौत हुई। इनमें चार मौतें करंट से और चार प्राकृतिक जैविक व पारिस्थितिक कारणों से बताई गईं। करंट से हुई मौतों में तीन बाघ अभयारण्य से सटे कृषि क्षेत्रों में अवैध रूप से बिछाए गए बिजली तारों के संपर्क में आए, जबकि एक बाघ सौर ऊर्जा चालित बाड़ में फंसने से मरा।

Bandhavgarh Tiger Reserve

‘सुरक्षित’ सोलर फेंसिंग पर सवाल

रिपोर्ट में सोलर फेंसिंग को कारण बताए जाने के बाद गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। आम तौर पर सोलर फेंसिंग से निकलने वाला डीसी करंट घातक नहीं माना जाता। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं अवैध रूप से उच्च वोल्टेज एसी लाइन का उपयोग तो नहीं किया गया या उपकरणों में तकनीकी खामी थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि सोलर फेंसिंग जानलेवा साबित हो रही है तो इसकी व्यापक जांच आवश्यक है।

अवैध बिजली तार और तकनीकी ऑडिट के निर्देश

रिपोर्ट में उल्लेख है कि संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने वाले बाघ खेतों में बिछे अवैध तारों की चपेट में आ जाते हैं। फील्ड डायरेक्टर ने विद्युत विभाग को पत्र लिखकर 11 केवी और निम्न वोल्टेज लाइनों का तत्काल तकनीकी ऑडिट करने, झुकी लाइनों को दुरुस्त करने और वन्यजीव गलियारों में सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।