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गणेश पाण्डेय, भोपाल। आलोट संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि पिछले 10 वर्षों में संघ के प्रशासनिक और प्रबंधकीय स्तर पर पदों का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां की गईं, जिससे आदिवासी हितों को नुकसान पहुंचा है। गुड्डू ने मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

पत्र में उल्लेख है कि यह संघ वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदाय को संगठित कर उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना था। लेकिन अधिकारियों की मनमानी और निगरानी की कमी के कारण यहां भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का बोलबाला हो गया।

10 वर्षों में 1500 करोड़ से अधिक गड़बड़ी का आरोप

पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच संघ के प्रशासक और प्रबंध संचालकों द्वारा पदों का दुरुपयोग करते हुए 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में अनियमितताएं हुईं। पत्र में कहा गया कि बिना समुचित अनुमोदन के विकास मद की राशि का उपयोग किया गया और निविदा प्रक्रिया में भी नियमों को दरकिनार कर भ्रष्टाचार किया गया।

नियमों को दरकिनार कर निजी हितों को लाभ

गुड्डू ने अपने पत्र में लिखा कि कई मामलों में संचालक मंडल की बैठकें नियमित रूप से नहीं हुईं और निर्णय बिना वैधानिक प्रक्रिया के लिए गए। बिजनेस मैनेजमेंट यूनिट (BMU) के गठन में भी अनियमितताएं बताते हुए करोड़ों रुपये के नुकसान की बात कही गई। साथ ही निजी एजेंसियों और ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

आदिवासी हित प्रभावित, निष्पक्ष जांच की मांग

पत्र में कहा गया कि संघ का मूल उद्देश्य आदिवासी संग्राहकों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन अनियमितताओं के कारण उन्हें अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाया। गुड्डू ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियां न बनें।