IMG 20260525 WA0001

सीडीवी संक्रमण की आशंका के बीच वन विभाग सतर्क; विशेषज्ञों की निगरानी में हुई जांच और उपचार

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में दो नर बाघों T-159 और T-125 का स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और निगरानी सफलतापूर्वक पूरी कर उन्हें दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया है। हाल के दिनों में रिजर्व क्षेत्र में बाघों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संक्रमण के मामलों के बाद वन विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है। इसी क्रम में दोनों बाघों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

सूत्रों के अनुसार, करीब सात से आठ वर्ष आयु के बाघ T-159 को सौफ बीट क्षेत्र में अगले पैर में चोट के कारण लंगड़ाते हुए देखा गया था। वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रैंक्विलाइज कर स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि बाघ के पैर में पुराने नाखून से लगी चोट और एक सतही घाव था। हालांकि घाव में प्राकृतिक रूप से ठीक होने के संकेत भी मिले।

उपचार के दौरान बाघ को आवश्यक दवाएं दी गईं और कैनाइन डिस्टेंपर वायरस सहित अन्य बीमारियों की जांच के लिए जैविक नमूने एकत्र किए गए। प्रारंभिक जांच में किसी गंभीर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। स्वास्थ्य स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद बाघ को पुनः उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

इसी प्रकार लगभग आठ वर्ष आयु के बाघ T-125 को भी निगरानी के तहत बेहोश कर जैविक नमूने लिए गए। विशेषज्ञों ने जांच में पाया कि बाघ में सीडीवी या अन्य संक्रामक बीमारियों के कोई लक्षण मौजूद नहीं थे। आवश्यक परीक्षण और निगरानी के बाद उसे भी सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद वन विभाग और वन्यजीव स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पूरे रिजर्व में निगरानी अभियान तेज कर दिया है। बाघों की गतिविधियों, स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को शुरुआती स्तर पर रोका जा सके।

वन अधिकारियों का कहना है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में अब नियमित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग, जैविक सैंपलिंग और मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।