गणेश पाण्डेय, भोपाल। वन विकास निगम के अध्यक्ष रामनिवास रावत का एक पत्र इन दिनों वन महकमे की गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। रावत ने वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वन विकास निगम के नए प्रबंध संचालक (एमडी) की नियुक्ति से पहले उनकी सहमति ली जाए। वर्तमान एमडी एच.यू. खान जुलाई में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिसके चलते नए एमडी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे समय में अध्यक्ष का यह पत्र सामने आने से विभागीय हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ही वन विकास निगम के एमडी की नियुक्ति करती है और सामान्यतः यह निर्णय वरिष्ठता, कार्यक्षमता तथा प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर लिया जाता है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया में वन बल प्रमुख की भी सीमित भूमिका रहती है, ऐसे में अध्यक्ष द्वारा उन्हें पत्र लिखकर अपनी सहमति अनिवार्य करने का आग्रह करना असामान्य माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के बीच यह भी चर्चा है कि इससे पहले किसी अध्यक्ष ने एमडी की नियुक्ति प्रक्रिया में अपनी भूमिका तय करने का प्रयास नहीं किया। यही वजह है कि यह पत्र वन विभाग और आईएफएस अधिकारियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
वन विभाग के जानकार अधिकारियों का कहना है कि वन विकास निगम के एमडी की नियुक्ति राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। आमतौर पर नियुक्ति का निर्णय वरिष्ठता, कार्य निष्पादन और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में अध्यक्ष द्वारा अपनी सहमति की बात उठाए जाने को कई अधिकारी परंपरागत व्यवस्था से अलग कदम मान रहे हैं। विभागीय स्तर पर इस पत्र को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इस संबंध में अब तक सरकार या वन बल प्रमुख की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उमाकांत पाण्डेय की पदस्थापना भी चर्चा में
वन विकास निगम की ओर से हाल ही में जारी आदेश में भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ एसडीओ उमाकांत पाण्डेय को डिवीजनल मैनेजर, विदिशा के पद पर पदस्थ किया गया है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि यह नियुक्ति अध्यक्ष रामनिवास रावत के दबाव में की गई। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पदस्थापना के बाद निगम के भीतर प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं और कई अधिकारी इसे लेकर चर्चा कर रहे हैं।
चार माह पहले आरोप पत्र के निर्देश, अब मिला नया पद
सूत्रों के अनुसार करीब चार महीने पहले निगम के एमडी एच.यू. खान ने तत्कालीन अतिरिक्त प्रबंध संचालक अर्चना शुक्ला की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीओ उमाकांत पाण्डेय के खिलाफ आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। आरोप था कि खंडवा डिवीजन में सागौन रूटशूट लगाने के लिए बिना अनुमति गड्ढे खोदकर भुगतान किया गया। हालांकि अब तक आरोप पत्र जारी नहीं हुआ, जबकि इसी बीच उन्हें विदिशा का डिवीजनल मैनेजर नियुक्त कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
