Oplusअजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, मप्र

तेंदूपत्ता लाभांश को लेकर सियासत गरमाई, 20 करोड़ की मांग पर बवाल

गणेश पाण्डेय, भोपाल। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लाभांश की राशि को लेकर मध्यप्रदेश में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वन विभाग द्वारा अभयारण्यों में तालाब निर्माण के लिए लघु वनोपज संघ से लगभग 20 करोड़ रुपये मांगे जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे तेंदूपत्ता संग्राहकों के अधिकारों के विपरीत बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

अजय सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि वनाश्रित आदिवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हितों के लिए निर्धारित राशि को अन्य मदों में खर्च करने का प्रयास न केवल अनुचित है, बल्कि लाभांश व्यवस्था की मूल भावना के भी विपरीत है। उनका कहना है कि प्रदेश के सबसे गरीब वनाश्रित परिवारों की मेहनत से अर्जित धन को दूसरे निर्माण कार्यों में उपयोग करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वन विभाग द्वारा प्रस्तावित राशि का हस्तांतरण तत्काल निरस्त किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि तेंदूपत्ता लाभांश की राशि केवल उन्हीं हितग्राहियों के कल्याण पर खर्च हो, जिनके लिए यह निर्धारित की गई है। मामले के सामने आने के बाद वन विभाग के प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर अब तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

2017 में भी उठा था ऐसा ही विवाद, तब जारी हुए थे स्पष्ट दिशा-निर्देश

तेंदूपत्ता लाभांश राशि को लेकर विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2017 में भी वन्यजीव शाखा ने टाइगर रिजर्व के कार्यों के लिए लघु वनोपज संघ से लाभांश राशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा था। उस समय तत्कालीन लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक जव्वाद हसन ने नियमों का हवाला देते हुए राशि जारी करने से इनकार कर दिया था।

बाद में तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जितेंद्र अग्रवाल और एमडी जव्वाद हसन के संयुक्त हस्ताक्षर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया कि तेंदूपत्ता लाभांश की राशि केवल उन्हीं टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों में खर्च की जा सकती है, जहां से वास्तविक रूप से तेंदूपत्ता संग्रह हुआ हो। कोर क्षेत्र में इस राशि का उपयोग करने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य लाभांश राशि को उसके मूल उद्देश्य से भटकने से रोकना था।

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क्या कहते हैं नियम, किसे है राशि मांगने का अधिकार?

लघु वनोपज संघ की लाभांश राशि के उपयोग के लिए स्पष्ट प्रशासनिक प्रक्रिया निर्धारित है। नियमों के अनुसार टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर या उप संचालक सीधे लघु वनोपज संघ से राशि की मांग नहीं कर सकते। यदि किसी बफर क्षेत्र में विकास कार्य के लिए राशि की आवश्यकता होती है तो प्रस्ताव पहले संबंधित जिला लघु वनोपज संघ के प्रबंधक (डीएफओ) तैयार करते हैं। इसके बाद प्रस्ताव मुख्य महाप्रबंधक (सीएफ) के माध्यम से लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक तक पहुंचता है। विभागीय जानकारों का कहना है कि यदि प्रस्ताव इस निर्धारित प्रक्रिया से हटकर सीधे भेजा जाता है तो उसे नियम विरुद्ध माना जा सकता है। वर्तमान मामले में भी विभागीय सूत्र इसी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

लाभांश राशि का उद्देश्य क्या है, क्यों उठ रहे हैं सवाल?

लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा अर्जित शुद्ध लाभ का उपयोग कानून के तहत निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया जाता है। नियमानुसार 75 प्रतिशत राशि सीधे तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस के रूप में वितरित की जाती है। शेष राशि का उपयोग ग्रामीण एवं वनाश्रित समुदायों के कल्याण, वनों के पुनरुत्पादन तथा आधारभूत संरचना विकास के लिए किया जाता है।

वन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि अभयारण्यों में तालाब निर्माण जैसे कार्यों के लिए पहले से कैम्पा फंड, वन्यजीव बजट और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत अलग वित्तीय प्रावधान उपलब्ध हैं। ऐसे में यदि लाभांश राशि को इन कार्यों के लिए उपयोग करने का प्रयास किया जाता है तो यह वित्तीय प्राथमिकताओं और लाभांश व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर सकता है।